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आरओबी के लिये किसान अपनी भूमि देने को तैयार, लिखित में जतायी सहमति

By Suresh Agrawal, Kesinga, Odisha

 अनुदान को लेकर प्रदेश एवं केन्द्र सरकार के बीच सहमति न बनने के कारण विगत चार साल से अधर में लटके रेलवे ओवरब्रिज को अब केन्द्र की हरी झण्डी मिल गयी है और केन्द्र द्वारा उस पर आने वाले कुल 292 करोड़ के परियोजना ख़र्च को स्वीकृति प्रदान कर काम तुरन्त आरम्भ करने का निर्देश दिया गया है। परन्तु विडम्बना की बात यह है कि कुछ निहित राजनीतिक स्वार्थी तत्व अब भी इस आरओबी के काम में अड़ंगा डालने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।

इस बार अच्छी बात यह है कि -आरओबी के लिये जिन लोगों की भूमि अधिग्रहित की जानी है, वे स्वयं उसे सहर्ष देने को राजी हो गये हैं और ऐसे तमाम लोगों द्वारा इस पर ज़िलाधीश एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को लिखित में अपनी सहमति प्रदान की गयी है। ज्ञातव्य है कि गत तीन-चार साल पहले जब से आरओबी हेतु भूमि अधिग्रहण करने स्थानीय तहसीलदार द्वारा अधिसूचना ज़ारी की गयी, तब से किसान न तो उस पर खेती-किसानी कर पा रहे थे और न ही उसे बेचने की स्थिति में थे।

योजना हेतु अनुदान को लेकर केन्द्र एवं ओड़िशा शासन के बीच चल रही खींचतान के बीच अब कालाहाण्डी के सांसद एवं ओड़िशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के हस्तक्षेप के बाद केन्द्र द्वारा अनुदान को मंज़ूरी दे दी गयी है। यह असमंजस समाप्त होने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली है। किसानों का कहना है कि कुछ लोग अब भी उन्हें भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।
इस परिप्रेक्ष्य में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष तपस्विनी माझी की अध्यक्षता में हुई विभिन्न विभागों के अधिकारी, पार्षद एवं बुध्दिजीवियों की समीक्षा बैठक में भी किसी ने योजना का विरोध नहीं किया था। समझ में न आने वाली बात यह है कि- अब जबकि आरओबी हेतु 3-जी विज्ञप्ति प्रकाशित हो चुकी है, फिर विरोध क्यों ? किसान मानते हैं कि उन्हें अब न्याय मिला है, फिर अड़ंगा किस बात का ?

दूसरी ओर इस परिप्रेक्ष्य में गत 19 सितम्बर को सचेतन नागरिक मंच द्वारा आहूत बैठक को मंच द्वारा ऐन वक्त पर रद्द किया जाना भी लोगों के मन में अनेक संदेह पैदा कर रहा है।
इस तमाम ऊहापोह की स्थिति पर ओड़िशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रदीप्त नायक द्वारा सूझबूझ भरा वक्तव्य ज़ारी कर कहा गया है कि -अब आरओबी पर कोई विवाद न उठाया जाये, क्योंकि उस पर शीघ्र ही काम शुरू होने वाला है। यदि इसे लेकर किसी की कोई आपत्ति है, तो वह अपनी बात रखें। यदि बात सामूहिक हित की हुई तो उसका समाधान अवश्य निकाला जायेगा।



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