Anil Azad Pandey, Beijing
चीन की राजधानी बीजिंग में 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया गया। भारतीय दूतावास में हुए कार्यक्रम में भारत की प्राचीन परंपरा और आयुर्वेद संबंधी जीवनशैली पर ज़ोर दिया गया।
11वें आयुर्वेद दिवस पर चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने अहम भाषण दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल बीमारियों के इलाज की पद्धति नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक ऐसा तरीका है, जो मानव को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना सिखाता है। इस दौरान दोराईस्वामी ने आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. सी. के. शफीक और डॉ. धनवंतरी झा को सम्मानित किया।
इस दौरान आयोजित वर्कशॉप में आयुर्वेद की प्राचीन प्रद्धति और आधुनिक जीवनशैली के बीच सामंजस्य बिठाने पर ज़ोर दिया गया। साल 2026 के आयुर्वेद दिवस की थीम, स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद रखी गयी है।
आयुर्वेद दिवस पर दूतावास के कैंपस में आयुर्वेद संबंधी चीज़ों के स्टाल लगाए गए थे। जबकि योग के स्टॉल के साथ-साथ मोटे अनाज (मिलेट) से बने व्यंजनों और आयुर्वेदिक उत्पादों वाले फूड स्टॉल ध्यान का केंद्र रहे। जिनसे लोगों को भारत की पारंपरिक वेलनेस प्रणालियों के विभिन्न पहलुओं को जानने और अनुभव करने का मौका मिला।

कार्यक्रम में दो आयुर्वेद विशेषज्ञों के भाषण और वर्कशॉप आकर्षण का केंद्र रहे। जहां चीन में रहने वाले डॉ. सीके.मो.शफीक और भारत से आए डॉ. धनवंतरी झा ने आयुर्वेद और स्वास्थ्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। चीनी, भारतीय व अन्य देशों के लोगों ने आयुर्वेद और प्राचीन भारतीय परंपरा और सभ्यता के प्रति काफी रुचि दिखाई। डॉ. धनवंतरी झा ने आयुर्वेद पर एक लेक्चर दिया और“स्ट्रेस मैनेजमेंट और अच्छी नींद के लिए आयुर्वेद”पर एक वर्कशॉप आयोजित की। जिसमें प्राणायाम, शिरो-अभ्यंग,नस्य और मर्म जैसे व्यवहारिक तरीके बताए गए। इसके साथ ही उन्होंने अच्छी नींद को स्वस्थ जीवन के लिए बहुत अहम करार दिया। उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्रम आधुनिक जीवन में आयुर्वेद की अहमियत बताने और भारत व चीन के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक अच्छा अवसर था।
जबकि डॉ. शफीक ने आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय नुस्खों से रोजमर्रा की ज़िंदगी में निरोग रहने के उपायों की जानकारी दी।
वीयोग संस्थान के प्रमुख एवं जाने-माने योग गुरु आशीष बहुगुणा ने हमारे साथ बातचीत में कहा कि योग और आयुर्वेद एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। दोनों भारतीय परंपरा व समग्र स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं, जो हमें स्वस्थ, संतुलित और बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
गौरतलब है कि आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीन और पारंपरिक चिकित्सा पद्धितयों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति करीब 5 हज़ार साल पहले भारत में हुई थी।
(लेखक चाइना मीडिया ग्रुप में वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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