पानी रे पानी…
By GD Pandey, Delhi पानी रे पानी, तेरी महिमा, किसी ने नहीं जानी. कब कौन सा नया गुल खिला दे? कब कितना झमाझम से हंसा दे? कब कितना लबालब से रुला दे? किस तरफ हो जाए तेरी मेहरबानी? तेरी महिमा, किसी ने नहीं जानी. बूंद बूंद से सागर बने, बूंद बूंद से यह बादल, […]














