वनाग्नि रोकने में जनसहयोग सबसे बड़ा हथियार- सुबोध उनियाल
देहरादून। राज्य में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं के बीच वन विभाग प्रोत्साहन योजना शुरू करने जा रहा है। सीजन के बाद हर जिले में वनाग्नि की रोकथाम में अच्छा काम करने वाले वनकर्मियों, समूहों और व्यक्तियों को पुरस्कार दिए जाएंगे। पहला पुरस्कार एक लाख, दूसरा, 75 हजार और तीसरा पुरस्कार 50 हजार रुपए का होगा।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि योजना का प्रस्ताव जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। उन्होंंने कहा कि वन विभाग जंगलों की आग बुझाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। जंगलों से होकर गुजरने वाली सभी पेयजल लाइनों पर हाईडेंट लगाए जाएंगे ताकि आग लगने की स्थिति में तुरंत पानी उपलब्ध हो सके। साथ ही चीड़ पीरूल संग्रह अभयान के तहत 8555 टन पीरूल जमा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे आग फैलने की घटनाओं में अंकुश लग सकेगा।
वन मंत्री ने कहा कि वनाग्ïिन रोकने में जनसहयोग सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को वनाग्ïिन की सूचना तुरंत विभाग को देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आग लगने पर लोग वीडियो बनाने के बजाए बुझाने में सहयोग करें।
फारेस्ट फायर रिस्क जोनेशन मैपिंग के मुताबिक अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी सबसे संवेदनशील जिले हैं। इस सीजन में अब तक वनाग्ïिन की 394 घटनाओं में 331.12 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है।







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