एक से आठवीं तक के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए अनिवार्य है टीईटी
देहरादून। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा की तर्ज पर अब उत्तराखंड में साल में दो बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूटीईटी) कराने की तैयारी है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मुताबिक केंद्र सरकार की सीटीईटी की तरह राज्य सरकार भी साल में दो बार यूटीईटी कराएगी। इसके अलावा अन्य विकल्पों पर भी जल्द कोई निर्णय लिया जाएगा ताकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप शिक्षक टीईटी कर सकें। उत्तराखंड में अंतिम यूटीईटी परीक्षा 27 सितंबर 2025 को हुई थी। इसे लगभग एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। तब से अब तक राज्य में कोई टीईटी परीक्षा नहीं हुई है। जबकि केंद्र सरकार वर्ष में दो बार सीटीईटी परीक्षा आयोजित करती है।
उत्तराखंड बोर्ड के सचिव विनोद सिमल्टी का कहना है कि वर्तमान में साल में एक बार शिक्षक पात्रता परीक्षा कराई जा रही है। शासन का निर्देश मिलने पर ही इसे साल में दो बार कराया जा सकेगा।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा एक से आठवीं तक के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य किया हुआ है। पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए उन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना अनिवार्य है, लेकिन उत्तराखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) साल में मुश्किल से एक बार हो रही है। इससे शिक्षकों को सीटीईटी की तर्ज यूटीईटी करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे।
वहीं, सीटीईटी और यूटीईटी के आवेदन में 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षक जो बीएड हैं, उनके लिए कोई अलग से विकल्प नहीं है। जिससे राज्य में हजारों सेवारत शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया है। इस बीच कुछ शिक्षकों की ओर से उनके लिए अलग से विशेष यूटीईटी कराए जाने की मांग की जा रही है। लेकिन बताया गया है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों में सेवारत शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय टीईटी का प्रावधान नहीं है। ऐसे में यूटीईटी प्रथम के लिए आवेदन में आवश्यक योग्यताओं के साथ सेवारत शिक्षक का विकल्प जोड़ा जाना चाहिए।







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