कला संस्कृति

फूल देई, छम्मा देई, दैंण द्वार, भरिए भकार..

फूल देई, छम्मा देई
दैंण द्वार, भरिए भकार
ये देली स बारम्बार नमस्कार
फूले द्वार, फूल देई छ्म्मा देई।

Report ring desk 
लोक पर्व फूलदेई आज मनाई जा रही है। वसंत ऋतु के स्वागत से जुड़ा यह पर्व चैत्र संक्रांति को मनाया जाता है। बच्चे घर की देहरी पर प्योली, बुरांश, सरसों सहित आदि रंगबिरंगे फूलों को डालते हैं। मंगल गीत फूल देई छम्मा देई गाते हैं। चैत्र संक्रांति यानि हिंदू कलैंडर का प्रथम दिन भी है। इस संक्रांति को उत्तराखण्ड में फूलदेई के नाम से लोक पर्व मनाया जाता है।

इस त्यौहार को लेकर ग्रामीण इलाकों में बच्चों में खासा उत्साह रहता है। एक दिन पहले बच्चे फूलों को जमा कर लेते हैं। सुबह नए कपड़े पहनकर सबसे पहले अपनी घर की देहरी पूजते हैं। इसके बाद आस पड़ोस के घरों में देहरी पूजन के लिए जाते हैं। फूल देई, छम्मा देई गीत गाते हैं। इसकेे बदले में बच्चों को चावल, गुड़ और पैसे दिये जाते हैं। घर आकर इन्हीं चावलों की बच्चों के लिए खीर बनाई जाती है। यह पर्व प्रकृति प्रेम और वसंत ऋतु के स्वागत के लिए भी जाना जाता है।



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