नई दिल्ली। करीब आठ महीने से अधिक समय से पंजाब-हरियाणा सीमाओं पर डेरा डाले किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी सहित कई मुद्दों पर अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को संसद तक अपना विरोध मार्च फिर से शुरू कर दिया है। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसान 13 फरवरी से डटे हैं। किसान नेता सुरजीत सिंह फूल, सतनाम सिंह पन्नू, सविंदर सिंह चौटाला, बलजिंदर सिंह चडियाला और मंजीत सिंह के नेतृत्व में 101 किसानों के एक समूह ने दोपहर 1 बजे शंभू बॉर्डर से दिल्ली की ओर मार्च शुरू किया। लेकिन शंभू बार्डर पर पुलिस ने किसानों को रोक लिया। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने मंच से एलान कर मर जीवड़े जत्थे को वापस बुला लिया है। पंधेर उन्हें खुद लेने पहुंचे। अब किसानों की बैठक के बाद आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
किसानों के विरोध को देखते हुए हरियाणा के अंबाला जिले में 9 दिसंबर तक इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। पुलिस ने कहा कि सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और उनके पास किसानों से निपटने के लिए पर्याप्त बल हैं। बार्डर पर भारी बैरिकेडिंग की गई है और अंबाला प्रशासन ने पांच या अधिक लोगों के इक_ा होने पर प्रतिबंध लगा दिया है। पंधेर ने कहा कि किसान ट्रैक्टर लेने के बजाय पैदल मार्च करेंगे। पंढेर ने कहा कि हम पिछले आठ महीने से यहां बैठे हैं। इन आरोपों के जवाब में कि हमारे ट्रैक्टर संशोधित हैं, हमने पैदल दिल्ली तक मार्च करने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन को खाप पंचायतों और व्यापारिक समुदाय के सदस्यों से समर्थन मिला है। किसान मुख्य रूप से फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं और इससे पहले उन्होंने 13 फरवरी और 21 फरवरी को दिल्ली की ओर मार्च करने का प्रयास किया था।