Anil Pandey, Beijing
भारत में पिछले दिनों पेपर लीक के मामले सामने आने के बाद पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। लेकिन पड़ोसी देश चीन में विभिन्न परीक्षाएं सुचारू और सही ढंग से आयोजित हो रही हैं। गत 7 और 8 जून को चीन में राष्ट्रव्यापी कॉलेज प्रवेश परीक्षा संपन्न हुई, जिसमें देशभर के चीनी छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। हर वर्ष आयोजित होने वाली इस प्रवेश परीक्षा को काओ खाओ नाम से भी जाना जाता है। जो कि दुनिया का सबसे मुश्किल एग्ज़ाग्ज़ाम बताया जाता है। इस परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले छात्रों का भविष्य काफी उज्ज्वल दिखाई देता है, क्योंकि अच्छी मेरिट के आधार पर उन्हें चीन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एडमिशन मिलता है। जिनमें पेकिंग यूनिवर्सिटी, छिंहुआ व फूतान यूनिवर्सिटी आदि शामिल हैं। इन विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने के बाद उन्हें बड़ी-बड़ी कंपनियों के ऑफर भी मिलते हैं।

यह चीनी छात्रों और उनके परिजनों के लिए बहुत बड़ा दिन होता है, ऐसे में वे एग्जाम की तैयारी में खूब समय बिताते हैं। हर साल इस एंट्रेस एग्ज़ाग्ज़ाम में एक करोड़ से अधिक छात्र भाग लेते हैं। चीनी शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस बार के काओ खाओ एग्ज़ाग्ज़ाम में कुल 1 करोड़ 29 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था। हालांकि पिछले साल इस परीक्षा के लिए पंजीकरण कराने वाले छात्रों की तादाद 1 करोड़ 33 लाख थी। इस तरह 2026 में छात्रों की संख्या कम हुई है।
शिक्षा मंत्रालय की ओर जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि कॉलेज प्रवेश परीक्षा को सुरक्षित ढंग से आयोजित कराने के लिए पूरे देश में पुख्ता इंतजाम किए गए थे। एग्जाम में नकल, धोखाधड़ी आदि को रोकने के लिए खास तैयारी की गयी थी। एग्ज़ाग्ज़ाम सेंटरों से सटे इलाके में पुलिस द्वारा कड़ी सुरक्षा की गयी। जबकि कुछ स्कूलों में,, धोखाधड़ी को रोकने के लिए चेहरा पहचानने की तकनीक का भी सहारा लिया गया।
वहीं संबंधित विभागों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षा के माहौल को बेहतर बनाने, एग्जाम में चीटिंग डिवाइस की बिक्री व नकल पर रोक लगाने और अनियमित ट्रेनिंग संस्थानों को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाए। मोबाइल और स्मार्ट ग्लास आदि से होने वाली धोखाधड़ी को रोकने लिए तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था की गयी। एग्जाम खत्म होने के बाद भी परीक्षा कॉपी आदि की सुरक्षा और जांच को लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

ध्यान रहे कि यह परीक्षा छात्रों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और मुश्किल परीक्षा होती है। ऐसे में छात्रों के परिजन भी इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। इम्तिहान के दिन एग्जाम सेंटरों के बाहर चिंतित और उत्साहित परिजन नजर आते हैं। परीक्षा में अच्छा करने वाले छात्रों के मां-बाप खुश दिखते हैं,, हालांकि अन्य लोग उदास भी होते हैं।
बता दें कि यह परीक्षा हर साल जून के महीने में आयोजित होती है। इस परीक्षा में अच्छे मार्क्स लाकर चीनी छात्र अपने सुंदर भविष्य के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते हैं। जबकि भारत में समय-समय पर विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन होता है और छात्र उनके जरिए भी अपना करियर संवारने का सपना लिए होते हैं। लेकिन होनहार छात्रों को पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों से निराशा हाथ लगती है।
जैसा कि हम जानते हैं कि भारत में बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं और सीबीएसई और राज्य बोर्डों में धोखाधड़ी, गड़बड़ी व नकल करने के मामले सामने आ रहे हैं,, वहीं चीन ने इतनी बड़ी परीक्षा का सफल आयोजन किया है। जो काबिलेतारीफ है, क्योंकि भारत और चीन आबादी के मामले में लगभग बराबर हैं( अब भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है)। ऐसे में अगर चीन में इतने बड़े एग्ज़ाग्ज़ाम को सही और निष्पक्ष तरीके से संपन्न किया जा सकता है तो फिर इंडिया में क्यों नहीं है। यह एक बड़ा सवाल है, जो बार-बार उठाया जाना चाहिए।
(The writer is a senior Journalist and working with China Media Group)







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