साहित्य

हे मातृ भूमि तुझको नमन !

Jai Krishna Pandey ‘Krishna’

हे मातृ भूमि तुझको नमन ।
जन्म जहाँ हमने लिया, सदा इसी के हैं संतान ।
अन्न ग्रहण जहाँ किया, सदा जहाँ निवास है ।
माँ हम हैं तुम में ही बसे, तुझमें ही कर रहे रमन ।।1।।

हे मातृ भूमि तुझको नमन ।
स्नेह है तुमने दिया, प्रेम है तेरे लिए ।
जो कुदृष्टि तुझपे किए, उसे सदा ही नसे ।
नृप भी हो मार्ग में , करेंगे उसका शमन ।।2।।

हे मातृ भूमि तुझको नमन ।
रंग जाति भिन्न है, धर्म भी अनेक हैं ।
भाषाओं की विविधता है, फिर भी सब एक हैं ।
जो तुझपे आए आपदा, एक मार्ग पर करें गमन ।।3।।

हे मातृ भूमि तुझको नमन ।
प्रार्थना तेरी करूं, ये मुझे आशीष दे।
लालसा हरदम रहे, चरण में तेरे शीश दे ।
स्वर्ग से भी है “कृष्णा”, भारत का ये चमन ।।4।।

लेखक पत्रकार और कवि हैं।



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