नई दिल्ली। अपनी जादुई बल्लेबाजी और गेंदबाजी से क्रिकेट इतिहास में अमिट छाप छोडऩे वाले वेस्टइंडीज के महान पूर्व कप्तान सर गारफील्ड सोबर्स हमारे बीच नहीं रहे। 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने बारबाडोस स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके बेटे डैनियल सोबर्स ने इस बेहद दुखद समाचार की पुष्टि की। उनके निधन की खबर आते ही पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों और क्रिकेट गलियारों में शोक की लहर छा गई। प्यार से लोग उन्हें सर गैरी सोबर्स भी कहते हैं। सर गारफील्ड सोबर्स अपने जीवन के 90 साल पूरे करने से महज 10 दिन दूर थे।
सर गारफील्ड सोबर्स को वेस्टइंडीज क्रिकेट को दुनिया के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने का मुख्य सूत्रधार माना जाता है। वह एक ऐसे खिलाड़ी थे जो मैदान पर उतरते ही मैच का पासा पलट देते थे। क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम एक ऐतिहासिक कारनामे के लिए हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।साल 1968 में नॉटिंघमशायर की तरफ से खेलते हुए उन्होंने ग्लेमोर्गन के खिलाफ एक ओवर की 6 गेंदों पर लगातार 6 छक्ïके जडक़र प्रथम श्रेणी क्रिकेट में इतिहास रच दिया था। वह ऐसा करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने थे। खेल में उनके इसी अद्वितीय योगदान को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी साल 2004 से हर साल पुरुष क्रिकेटर ऑफ द ईयर को ‘सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी’से सम्मानित करती है।
गैरी सोबर्स क्रिकेट इतिहास में अब तक के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर माने जाते हैं। उन्होंने मार्च 1954 से लेकर अप्रैल 1974 के बीच वेस्टइंडीज के लिए कुल 93 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 57.78 की कमाल की औसत से 8,032 रन बनाए जिसमें 26 शतक और 30 अद्र्धशतक शामिल रहे। बल्लेबाजी के साथ-साथ अपनी बेहतरीन गेंदबाजी से भी उन्होंने विरोधियों के पसीने छुड़ाए। वह बाएं हाथ के कलात्मक बल्लेबाज होने के साथ-साथ बाएं हाथ के तेज-मध्यम गति के गेंदबाज भी थे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 235 विकेट अपने नाम किए। उन्होंने अपने करियर में सिर्फ एक वनडे मैच खेला था जिसमें उन्होंने एक विकेट हासिल किया था।







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