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यूक्रेन संकट के बीच रूसी विदेश मंत्री की भारत यात्रा के मायने

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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में भारत ने अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों से दूरी बनाए रखी है। मोदी सरकार ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए रूस का साथ देने का फैसला किया। हालांकि अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों के नेता इंडिया को मनाने की पुरजोर कोशिश कर चुके हैं। इस दौरान अमेरिकी उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दलीप सिंह और ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस ने भारत का दौरा कर भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर आदि नेताओं  से भेंट की। लेकिन इन सबके आग्रह के बाद भी भारत अपने रुख पर कायम है। इसी तनावपूर्ण माहौल में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भारत पहुंच चुके हैं। उनकी इंडिया यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लावरोव के दौरे पर अमेरिका समेत समूचे विश्व की नजरें लगी हैं।

जहां एक ओर रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है, वहीं रूसी विदेश मंत्री ने भारत पहुंचकर दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भेंट की। ध्यान रहे कि लावरोव ने बृहस्पतिवार को अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा शुरू की थी।

विदेश मंत्री जयशंकर के साथ मुलाकात के वक्त रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि, भारत और रूस सामरिक भागीदारी विकसित करते रहे हैं। जो हमारी प्राथमिकता का अहम भाग है। हम निश्चित रूप से वैश्विक व्यवस्था में संतुलन बनाने में रुचि रखते हैं। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुभकामनाएं भेजी हैं। इसके साथ ही रूसी नेता ने कहा कि वे भारत की इस बात के लिए प्रशंसा करते हैं कि वह इस मामले पर किसी के दबाव में न आकर पूरी सूझबूझ के साथ आगे बढ़ रहा है।

रूसी विदेश मंत्री के साथ हुई चर्चा में भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि, यह बैठक कोरोना महामारी व चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल में हो रही है। हम दोनों में कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध बने हुए हैं। साथ ही भारत हमेशा कूटनीति के जरिए विवादों को सुलझाने के पक्ष में रहा है।

अमेरिका ने दी भारत को चेतावनी

अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दलीप सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि जो देश रूस को किसी भी रूप में मदद देने की कोशिश करेंगे उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। लेकिन अमेरिका को यह समझना होगा कि भारत की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति है, वह एक संप्रभु देश है। जो कि अपने राष्ट्रीय हितों को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।

इस बीच पश्चिमी देशों की निराशा तब चरम पर पहुंच गयी, जब रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव नई दिल्ली पहुंचे। जो भारत और रूस के मजबूत संबंधों का एक बड़ा उदाहरण है।

इस बीच ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज़ ट्रस मोदी सरकार को मनाने इंडिया पहुंचीं, इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भेंट की। खबरों के मुताबिक भारत ने उनसे साफ-साफ कह दिया कि वह रूस से तेल सामान्य तौर पर लेता रहेगा। इतना ही नहीं भारतीय विदेश मंत्री ने ट्रस को आईना दिखाते हुए कहा कि हमें तेल न खरीदने की नसीहत देने वाले यूरोपीय राष्ट्रों को अपने को देखना चाहिए। क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप ने रूस से पहले से ज्यादा तेल खरीदा है। वहीं ट्रस ने कहा कि ब्रिटेन रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को लेकर दृढ़ है, साथ ही इस साल के अंत तक वह रूस से तेल की निर्भरता खत्म करने के लिए सभी उपाय कर रहा है। ट्रस ने भारत को लेकर कहा कि, इंडिया एक संप्रभु राष्ट्र है, मैं भारत से यह नहीं कह सकती कि उसे क्या करना चाहिए।

 



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