नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआइ) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी तीन दिवसीय बैठक के बाद बुधवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25प्रतिशत) की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही अब रेपो दर बढक़र 5.50 प्रतिशत हो गई है। फरवरी 2023 के बाद यह पहला मौका है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में इजाफा किया है। इस फैसले का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई महंगी होना तय है। 5 से 7 अक्टूबर तक चली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सर्वसम्मति से दरें बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही आरबीआइ ने अपनी पॉलिसी का रुख बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है।
आरबीआइ गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह फैसला महंगाई के बदलते हालात को देखते हुए लिया गया है, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। मल्होत्रा ने कहा ‘महंगाई और उसके हालात अब उतने सामान्य नहीं हैं जितने पिछले साल थे।’ उन्होंने कहा कि अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन सीपीआइ महंगाई औसतन 5.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जबकि पूरे फाइनेंशियल इयर के लिए महंगाई का अनुमान 414 प्रतिशत है। मल्होत्रा ने कहा कि ग्लोबल ग्रोथ मजबूत बनी हुई है, लेकिन इस साल इसके धीमे होने की उम्मीद है। वहीं एनर्जी और खाने-पीने की चीज़ों की बढ़ती कीमतें ग्लोबल महंगाई को बढ़ा रही हैं और प्रमुख सेंट्रल बैंकों को मॉनेटरी पॉलिसी सख्त करने के लिए मजबूर कर रही हैं।







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