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‘अमर शूरवीर की शौर्य गाथा’ का शानदार मंचन

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कलश कलाश्री की ओर से अमर शहीद राइफलैन जसवंत सिंह रावत के जन्मदिन पर किया गया नाट्य मंचन

नई दिल्ली। देश के अमर शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के जन्मदिन के अवसर पर सामाजिक संस्था कलश कलाश्री की ओर से बुधवार सायं नाटक ‘अमर शूरवीर की शौर्य गाथा’ का शानदार मंचन किया गया। अमर शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के जीवन और अदम्य शौर्य पर आधारित इस नाट्य प्रस्तुति में वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान अरुणांचल प्रदेश के नूरानांग क्षेत्र में राइफलमैन जसवंत सिंह रावत द्वारा प्रदर्शित असाधारण वीरता, साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

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जसवंत सिंह रावत ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में चीनी सेना के विरुद्ध मोर्चा संभालते हुए अद्भुत साहस का परिचय दिया था। उनकी वीरता से जुड़ी लोकप्रिय गाथा में कहा जाता है कि उन्होंने अकेले ही बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों का सामना किया और दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया। उनका यह अदम्य साहस आज भी भारतीय सैनिकों और देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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कार्यक्रम का शुभारंभ कलश कलाश्री की टीम ने दीप प्रज्जवलित कर किया। नाट्य प्रस्तुति के दौरान कई दृश्य ऐसे आए जो बेहद भावुक कर देने वाले थे। वहीं कई ऐसे दृश्य दर्शाए गए जो दर्शकों के बीच देशभक्ति का जोश भर रहे थे। देशभक्ति से ओतप्रोत इस नाट्य प्रस्तुति के दौरान कई बार सभागार दर्शकों की तालियों और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। दर्शकों ने नाट्य मंचन की काफी प्रशंसा की।

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कलश कलाश्री के अध्यक्ष के.एन. पाण्डेय ने कहा कि इस नाट्य मंचन का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को देश के वीर सपूतों के त्याग, बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण से परिचित कराना है।

निर्देशक खिलानन्द भट्ट ने कहा कि नाट्य मंचन के माध्यम से 1962 के भारत-चीन युद्ध की परिस्थितियों, सीमा पर भारतीय सैनिकों के संघर्ष और जसवंत सिंह रावत के अद्वितीय साहस को जीवंत करने का प्रयास किया गया। उन्होंने उपस्थित दर्शकों से कहा कि हम अपने नायकों को सिर्फ कहानियों तक सीमित कर देते हैं और फिर धीरे धीरे भुला देते हैं। उन्होंने दर्शकों से भी जानना चाहा कि दिन रात हमारी सुरक्षा में डटे रहने वाले ऐसे वीर योद्धाओं को याद किया जाना चाहिए कि नहीं। इस पर मौजूद सभी दर्शकों ने एक स्वर में कहा कि बिल्कुल याद किया जाना चाहिए।

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दर्शकों से भरे एलटीजी सभागार में मंच का संचालन कलश कलाश्री के जीवन पाण्डेय और ममता कर्नाटक ने किया। इस अवसर पर कलश कलाश्री की स्मारिका का विमोचन भी किया गया और मुख्य अतिथियों को पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका स्वागत किया गया।

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