नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र की शुरुआत पर गुरुवार को मीडिया को संबोधित करते कहा कि बजट सत्र केवल एक वार्षिक वित्तीय लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। पीएम ने कहा कि कल राष्ट्रपति का भाषण 140 करोड़ भारतीयों के भरोसे को दिखाता है और उनकी क्षमताओं और आकांक्षाओं, खासकर युवाओं की आकांक्षाओं को बताता है।
उन्होंने कहा कि इस भाषण ने 2026 सत्र की शुरुआत में सभी सांसदों को मार्गदर्शन दिया है और विश्वास जताया कि सांसद राष्ट्रपति द्वारा बताई गई उम्मीदों को गंभीरता से लेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का 1/4 हिस्सा बीत चुका है। यह अगले चौथाई हिस्से की शुरुआत है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए इन 25 सालों का महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है। सदी के इस दूसरे चौथाई हिस्से का पहला बजट पेश होने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं जो लगातार 9वीं बार संसद में बजट पेश कर रही हैं। यह देश के संसदीय इतिहास में एक गौरवशाली क्षण के रूप में दर्ज हो गया है।
प्रधानमंत्री के संबोधन ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार का विजन दीर्घकालिक है। अब सभी की निगाहें वित्त मंत्री के पिटारे पर टिकी हैं कि वह ‘विकसित भारत’ के इस दूसरे चरण की नींव कैसे रखती हैं।







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