देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का मंगलवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। पिछले दो महीने से उनका इलाज मैक्स अस्पताल में चल रहा था, आज सवा 11 बजे उन्होंने 92 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली।उनके निधन की खबर सुनते ही प्रदेश में शोक की लहर छा गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री ने निधन पर शोक व्यक्त किया है। कल हरिद्वार में खंडूड़ी का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
वे भारतीय सेना से मेजर जनरल के पद से रिटायर्ड हुए थे और उत्तराखंड के चौथे मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की सेवा की। खंडूड़ी उत्तराखंड के दो बार मुख्यमंत्री बने। इससे पहले वे केंद्रीय मंत्री भी रहे।भारतीय सेना से रिटायरमेंट के बाद उनका 30 साल का राजनीतिक करियर रहा है।
भुवन चंद्र खंडूड़ी की गिनती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भरोसेमंदों में होती थी। पहली बार लोकसभा पहुंचने के दो साल के भीतर ही खंडूड़ी को पार्टी का मुख्य सचेतक बना दिया था।
1996 के लोकसभा चुनाव में खंडूड़ी को हार का सामना करना पड़ा था। 1999 में अटल बिहारी सरकार में खंडूड़ी को सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया। इस दौर में देश में सड़कों की शक्ल बदलने और हाईवे बनाने का काम हुआ जिसके लिए खंडूड़ी की आज तक प्रशंसा होती है। कहा जाता है कि वाजपेयी का खंडूड़ी पर इतना भरोसा था कि उन्हें काम करने की पूरी आजादी मिली हुई थी।
वर्ष 2007 से 2009 खंडूरी उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रहे। वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आने पर खंडूरी को पुनः मुख्यमंत्री बनाया गया। वर्ष 2014 में मोदी लहर में भाजपा ज़ब केंद्र में पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई तो खंडूरी को रक्षा मामलो की सांसदीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया।







Leave a Comment