नैनीताल। ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली बीमारियों और दो लोगों की मौत के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। क्षेत्र में अब तक 250 से अधिक लोगों के बीमार होने की बात सामने आई है।
अधिवक्ता रवि बिष्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ डॉ. रश्मि पंत समेत जल संस्थान और जल निगम के वरिष्ठ अधिकारी पेश हुए।
अदालत ने अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते सीवर और पेयजल पाइपलाइनों की मरम्मत कर दी जाती तो ग्रामीणों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
6 दिन में पानी के सैंपल की रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने पेयजल निगम के सचिव को कुमाऊं क्षेत्र के लिए प्रस्तावित वाटर टेस्टिंग लैब को जल्द मंजूरी देने के निर्देश दिए। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को नैनीताल और आसपास के 20 से 25 जल स्रोतों से सैंपल लेकर छह दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
पीठ ने स्थिति को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी को राहत कार्यों की स्वयं निगरानी करने, प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और सीवर लीकेज की समस्या के समाधान के लिए तत्काल हेल्पलाइन नंबर जारी करने के निर्देश दिए।
विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाने के निर्देश
स्वास्थ्य सुविधाओं पर हाईकोर्ट ने कहा कि 21वीं सदी में ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने पर बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बुलाने के निर्देश दिए गए।
कोर्ट के रुख के बाद जिलाधिकारी ने मरीजों के निजी लैब में एलाइजा समेत अन्य जरूरी जांच कराने के लिए चार लाख रुपये का बजट जारी किया है। जरूरत पड़ने पर बजट बढ़ाया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से बड़ी संख्या में मरीजों की लिवर संबंधी जांच रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष पेश की गई। साथ ही प्रभावित लोगों के नि:शुल्क इलाज और मुआवजे की मांग रखी गई।







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