– अपनी लोक संस्कृति से जुड़े रहें बच्चे- कोश्यारी
– मातृभाषा से जोडऩे के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत- डॉ. बछेती
नई दिल्ली। गढ़वाली-कुमाऊनी-जौनसारी अकादमी के तत्वावधान में उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली और डीपीएमआई द्वारा एमसीडी कन्वेंशन सेंटर में शिक्षक सम्मान समारोह का आयेोजन किया गया। समारोह का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की लोकभाषाओं गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी के संरक्षण, प्रसार और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोडऩे का था।
मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने बच्चों को अपनी लोक संस्कृति से जुड़े रहने, मातृभाषा में बात करने और उत्तराखंड की लोकभाषाओं को आगे बढ़ाने की अपील की। वहीं, उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच के संरक्षक व डीपीएमाई के चेयरमैन डॉ. विनोद बछेती ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोकभाषाओं के संरक्षण पर जोर देते हुए नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोडऩे के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की। टॉर्च इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया फाउंडेशन के डायरेक्टर शौर्य डोभाल ने भी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवत मनराल की टीम की ओर से गणेश वंदना के साथ शुरू की गई। इसके बाद देवभूमि उत्तराखंड जन एकता समिति, खजूरी के बच्चों ने ‘जय हो कुमाऊं, जय हो गढ़वाल’ गीत पर मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसे सभागार में मौजूद दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया। भगवत मनराल की टीम ने उत्तराखंड राज्य स्थापना पर आधारित ‘हम उत्तराखंडी छा’ पर एक भावुक कर देने वाली नृत्य नाटिका प्रस्तुत की, इसके अलावा उत्तराखंड में हो रहे पलायन पर भी बच्चों ने एक भावुक कर देने वाला नाटकीय प्रस्तुति दी। इसके अलावा राजधानी दिल्ïली और एनसीआर से आए कई विद्यालयों के बच्चों की ओर से कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी लोकनृत्य एवं गायन की खूबसूरत रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई जिसे दर्शकों बहुत पसंद किया और पूरा सभागार तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंजता रहाा।

मालूम हो कि वर्ष 2012 से यह मंच लगातार गर्मियों की छुट्टियों में कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी भाषाओं की कक्षाएं और कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है, जिनमें बच्चों को लोकभाषाओं के साथ-साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं से भी रूबरू कराया जाता है। इस वर्ष भी जून से अगस्त तक दिल्ली के विभिन्न केंद्रों में कक्षाएं आयोजित की गईं। समारोह के दौरान दिल्ली एनसीआर के 52 केंद्रों से जुड़े शिक्षकों का सम्मान किया गया। प्रत्येक केंद्र से चार-चार शिक्षकों व दो केंद्र संयोजकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में निगम पार्षद बी.एस. पवार, नीता बिष्ट, यशपाल कैंतुरा, संयोजक भाजपा उत्तराखंड प्रकोष्ठ, दिल्ली प्रदेश नरेंद्र मनराल, पूर्व निगम पार्षद सत्येश्वरी जोशी, पूर्व पार्षद एवं दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की पूर्व डिप्टी चेयरमैन तथा भाजपा उत्तराखंड प्रकोष्ठ दिल्ली प्रदेश की सह-प्रभारी तुलसी जोशी, जिलाध्यक्ष (भाजपा दक्षिणी दिल्ली) माया बिष्ट, पूर्व संयोजक (उत्तराखंड प्रकोष्ठ भाजपा दिल्ली प्रदेश) श्याम लाल, निदेशक (राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड) वीरेंद्र जुयाल और पूर्व डिप्टी चेयरमैन, नगर निगम दिल्ली ऊषा शास्त्री, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मदन मोहन सती समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनके अलावा दिनेश ध्यानी, दयाल सिंह नेगी, दिगपाल कैंतुरा, गिरीश सत्यावली भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

समारोह में शिक्षकों के योगदान की सराहना की गई और लोकभाषाओं के संरक्षण व नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोडऩे के प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।







Leave a Comment