साहित्य

हाँ! मैं एक फौजी हूँ

By Harish

हाँ! मैं एक फौजी हूँ,
सब कहते हैं मनमौजी हूँ,,

बचपन से मैंने
देखे सपने
सपने वो जो
आपने देखे
मैंने देखे
हम सबने देखे,

सपना वो जिसे मैंने
जीना सीखा
शरहद पर लड़ पाऊँ
दुश्मनों के छक्के छुड़ाऊँ
एक दिन
वतन के काम आऊँ
इसलिए
अपनी उमड़ती थकान को
पीना सीखा,

माँ-बाप को
गौरव दिला पाऊँ
देश को गौरवांवित
कर पाऊँ
एक सक्षम रक्षक
बन पाऊँ
स्वाभिमान से जीना
सिखा पाऊँ,

वर्षों की मेहनत
एक दिन रंग लाई
बहती हवा का रुख
बदल सा गया
आज मैं भारतीय फौज का
अभिन्न अंग बन गया
मैं उस हरी वर्दी के
लायक बन गया,

देखो माँ आज में
शरहद पर आया
साहसी सपूत
देश का कहलाया
दुश्मनों को मैंने
मार भगाया
श्वेत शियाचीन पर
तिरंगा लहराया,

मातृभूमि की रक्षा में
कपकपाती सर्दी को मैंने
अपना ग्रास बनाया
एक दिन देश की रक्षा में
अमर जवान
शहीद कहलाया,

देखो माँ जन-जन ने
कैसा शोर मचाया हैं
शांत निर्मल सी धरा भी
जिंदाबाद के नारों से
आज गूँज के भर आया हैं,

शौभाग्य था मेरा
कि मैं देश का
रक्षक बन पाया
भारत माँ का
साहसी सपूत कहलाया,

हाँ! मैं एक फौजी हूँ
सब कहते हैं मनमौजी हूँ,,

🙏🏻नमन हैं देश के जवानों को 🙏🏻
        जय हिंद

हरीश, हरदा पहाड़ी

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