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सावन में भी कालाहांडी में नहीं बरसे मेघ, खेतों में पड़ गयी ददार

By Suresh Agrawal, Kesinga, Odisha

अब जबकि श्रावण माह समाप्ति पर है, इस समय नदी, नालों सहित तमाम जलस्रोत उफ़ान पर होने चाहिये, परन्तु वर्षाभाव के कारण कालाहाण्डी ज़िले के अनेक क्षेत्रों में अब तक धान की बुआई-रोपाई का काम भी लम्बित पड़ा है। खेतों में दरार पड़ गयी हैं, तो कहीं अंकुरित पौधे मुरझा कर लाल पड़ गये हैं। वर्षाभाव के चलते नदियों का जलस्तर कम होने के कारण उनसे जुड़ी नहरों में भी पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा जा रहा। इस प्रकार सिंचाई व्यवस्था विद्यमान होते हुये भी धान रोपाई का काम सम्भव नहीं हो रहा। नहर के दूरस्थ क्षेत्र वाले किसानों के लिये तो पानी एक स्वप्न सा बन गया है और उन्हें सूखे की आहट स्पष्ट सुनाई देने लगी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ज़िले के कर्लामुण्डा प्रखण्ड के तहत ग्राम बोरपदर, राजपुर, रिंजा, तेरेसिंहा, एस. मालपड़ा, कर्लामुण्डा, रिषिड़ा, पौरकेला तथा गजबाहाल पंचायत का कोई आठ हज़ार हेक्टेयर का रक़बे में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, परन्तु पानी की कमी के चलते नहर के ऊपरी हिस्से वाले खेतों की पानी की ज़रूरतें ही पूरी हो पाती हैं, जबकि दूरस्थ हिस्से में पानी नहीं पहुँच पाता।

ज्ञातव्य है कि इलाके का शुमार सिंचित क्षेत्र में होने के कारण यहां मेगा उदवहन सिंचाई व्यवस्था भी नहीं हो सकती। यद्यपि, इसके लिये लम्बे समय से पौरकेला पंचायत से आवाज़ें भी उठती रही हैं, परन्तु सरकार पूरी तरह मूक-बधिर बनी बैठी है। उल्लेखनीय है कि गत सत्तर के दशक में आम्बगांव के समीप उत्तेई नदी पर आयकट का निर्माण कर नहर के ज़रिये जलापूर्ति हेतु एक महती परियोजना का काम शुरू किया गया था, परन्तु उसमें नदियाँ उफ़ान पर होने की स्थिति में ही पानी आता है, अन्यथा परियोजना पूरी तरह बेमानी है। जानकारों की मानें, तो उत्तेई-राहुल परियोजनाओं को जोड़ने का काम नहीं किया गया, तो क्षेत्र को चिर-सूखाग्रस्त होने से कोई भी नहीं बचा सकता।
इस परिप्रेक्ष्य में अधिक जानकारी प्राप्त करने हेतु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अमीय सामल से फ़ोन पर सम्पर्क साधने की कोशिश की गयी, परन्तु फ़ोन निरुत्तर रहा। अलबत्ता, प्रभारी कनिष्ठ अभियंता सुनील सेठी से पूछे जाने पर उन्होंने इतना अवश्य स्वीकार किया कि -नदी में पानी की पर्याप्त मात्रा नहीं है और वर्तमान जलस्तर गर्मियों जितना होने के कारण किसानों को पानी नहीं मिल रहा है। चालू वर्ष मुख्य नहर का जलस्तर महज़ 4.5 सतह है, जबकि वर्षा ऋतु में यह 8.5 सतह होना चाहिये।

यही कारण है कि दूरस्थ क्षेत्रों में नहर का पानी नहीं पहुँच पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली अगस्त से रोटेशन के आधार पर नहर में पानी छोड़ा जायेगा। प्रश्न उठता है कि यदि ऐसा हुआ तो खेती-किसानी का काम कब शुरू होगा ? किसानों का मानना है कि आगामी दो-तीन दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो भयंकर सूखे से बचना मुश्किल होगा।

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