साहित्य

पानी रे पानी…

By GD Pandey, Delhi

पानी रे पानी,
तेरी महिमा, किसी ने नहीं जानी.
कब कौन सा नया गुल खिला दे?
कब कितना झमाझम से हंसा दे?
कब कितना लबालब से रुला दे?
किस तरफ हो जाए तेरी मेहरबानी?
तेरी महिमा, किसी ने नहीं जानी.

 

बूंद बूंद से सागर बने,
बूंद बूंद से यह बादल,
बूंद बूंद से झरने बने,
बूंद बूंद से शुद्ध पेयजल.
गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती,
नर्मदा, सिंधु, कावेरी अलकनंदा,
सभी नदियां हैं, तेरी ही मेहरबानी,
तेरी महिमा, किसी ने नहीं जानी.

गंगा में बहता था गंगाजल,
नालों में रहता था गंदा जल,
जब गंगा में भी बहने लगा गंदा जल, तो और कहां मिलेगा शुद्ध पेयजल?
पानी रे पानी,
जल प्रदूषण मुक्त भारत बना दे!
बड़ी होगी तेरी मेहरबानी,
तेरी महिमा, किसी ने नहीं जानी.

पानी ही जल है,
जल ही जीवन है,
धरती में दो तिहाई पानी,
एक तिहाई जीवन है.
जल नहीं तो जीवन नहीं,
जिन ग्रहों में जल नहीं, जीवन भी नहीं.

जल बर्बादी ,जीवन की बर्बादी,
जल संरक्षण, जीवन की आबादी.
पानी अनमोल है, प्राण रक्षक है,
बरसात का पानी, संरक्षक है.
पानी रे पानी,
इस साल तेरी हुई बड़ी मेहरबानी,
देश में बराबर बरस रहा है खूब पानी,
तेरी महिमा, किसी ने नहीं जानी

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