साहित्य

मां भारती गांव की, बेटी उसके गांव की…

By GD Pandey, Delhi 

मां भारती गांव की,
बेटी उसके गांव की,
उसकी संस्कृति गांव की,
ग्रामीणअर्थव्यवस्था गांव की,
उसकी शिक्षा दीक्षा गांव की,
सीधी साधी बेटी गांव की,
वीर वाला है बेटी गांव की,
बुद्धिमान होती है बेटी गांव की.

बेटी के संघर्षों को सलाम,
उसकी सहनशीलता को सलाम,
बेटी की वफादारी को सलाम,
उसकी बहुआयामी प्रतिभा को सलाम,
डगर कठिन है गांव की,
बेटी लाडली है गांव की, फिर भी,
चुनौतियों का डटकर मुकाबला करती,
बेटी के इस जज्बे को बारंबार सलाम.

शहरों की चकाचौंध से दूर,
फैशन की फिरकी से दूर,
अंग्रेजी की गिटपिट से दूर,
पिज़्ज़ा, मोमोज, चाऊमीन से दूर,
ग्रामीण वातावरण में पलती बढ़ती,
खाती है रोटी मोटे अनाज की,
भाषा, वेशभूषा उसकी गांव की,
फौलादी औलाद है बेटी गांव की.

शहरी बेटियों की बराबरी करती,
कई मामलों में आगे बढ़ जाती.
बेटियों में है संतुलन , समर्पण और समझदारी,
परिवार की उन्नति में अग्रणी उनकी भागीदारी.
क्रांतिकारी परिवर्तनों की अग्रदूत हैं बेटियां,
इतिहास में रणचंडी भी बनी है मां की बेटियां.
राष्ट्रविकास की धुरी है बेटी गांव की,
सब कुछ कर सकती है बेटी गांव की.

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ,
सामाजिक रूढ़ियों से मुक्ति दिलाओ.
दुनिया देखना, समझना और फैसला लेना, है उसका प्राकृतिक अधिकार,
जुल्मो सितम के खिलाफ,
संघर्ष है उसका धारदार हथियार.
रोको मत, उसे आगे बढ़ने दो,
प्रेरित करो, उसे नैतिक समर्थन दो.
परिवार, समाज और देश का नाम, रोशन बखूबी करती है बेटी गांव की,

चूल्हे की चारदीवारी में चार चांद लगा सकती है बेटी की पढ़ाई,
मां-बाप का सीना चौड़ा करा सकती है बेटी की पढ़ाई.
शादी से ज्यादा जरूरी है बेटी की पढ़ाई,
सैद्धांतिक साथ निभाने वाला जीवन साथी है पढ़ाई.
बेटी को बेटी के पैरों पर खड़ा करा सकती है बेटी की पढ़ाई,
बेटा बेटी को अवसर की समानता सुनिश्चित करा सकती है,
बेटी की पढ़ाई.

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