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चीन अब नहीं बनेगा दूसरे देशों का डंपिंग ग्राउंड, पढ़िए स्टोरी

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 चीन में पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है। यह देश के हर प्रांत व क्षेत्र में देखा जा सकता है। सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के संचालन पर पाबंदी लगाने का काम किया है। इसके साथ ही वृक्षारोपण व नए पार्कों की स्थापना पर काफी जोर दिया गया है। इतना ही नहीं चीन ने कचरे के निपटान के लिए भी व्यापक कदम उठाए हैं। शांगहाई, पेइचिंग आदि महानगरों में कचरे का वर्गीकरण भी शुरु किया गया है। जाहिर है कि इससे चीन विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीन डिवेलपेंट का सपना साकार करना चाहता है।

यहां एक और जरूरी बात समझनी होगी कि विकसित देश अपने यहां के कचरे को विकासशील और गरीब देशों में डंप करते हैं। चीन का उदाहरण भी इसके लिए दिया जा सकता है। पहले चीन पश्चिमी देशों के लिए कचरे को ठिकाने लगाने की एक डंपिंग साइट हुआ करता था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। चीनी पारिस्थितिकी व पर्यावरण मंत्री हुआंग रनछोउ के शब्दों से यह समझा जा सकता है कि चीन अब अपने यहां के पर्यावरण को स्वच्छ बनाने पर खासा ध्यान दे रहा है।

यहां पेइचिंग से सटे हबेई प्रांत के सैहानपा कृत्रिम वन क्षेत्र का उल्लेख भी करना चाहूंगा। क्योंकि पाँच दशक पहले तक यह रेगिस्तानी इलाका था, जहां अकसर रेतीले तूफान आते थे। लेकिन वर्षों की मेहनत से वहां आज लाखों पौधे हैं, जिससे राजधानी पेइचिंग और आसपास के विभिन्न प्रांतों के पर्यावरण का स्तर सुधारने में मदद मिली है। चीनी राष्ट्रपति के नेतृत्व में चीन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर उपाय कर रहा है।

जहां तक ठोस अपशिष्ट की बात है, तो इस बाबत बहुत प्रगति देखी गयी है। रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में चीन में विकसित देशों से लगभग 42.27 मिलियन मीट्रिक टन कचरा आयात किया गया। फिर इसके बाद साल 2020 में इस तरह के कचरे को चीन में डंप करने की मात्रा घटाकर 8.79 मिलियन मीट्रिक टन कर दी गयी। हालांकि अब दूसरे देशों का कचरा चीन में नहीं आ सकता है, क्योंकि इस पर पाबंदी लगा दी गयी है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके अलावा चीन में घरेलू अपशिष्ट रिसाइक्लिंग सिस्टम में सुधार किया जा रहा है। पिछले साल पूरे देश में कुल 370 मिलियन टन कचरे को रिसाइकल किया गया। जो कि वर्ष 2016 की तुलना में 42 फीसदी ज्यादा है।

ध्यान रहे कि पर्यावरण संरक्षण के संबंध में लोगों के बीच बढ़ती जागरूकता और प्रदूषण को कम करने के लिए 2017 में विशेष योजना लागू की गयी। इसका मकसद विदेशों से आयात होने वाले अपशिष्ट की स्थिति को पूरी तरह से समाप्त करना था। वहीं कचरे की तस्करी को रोकने के लिए भी चीन के संबंधित मंत्रालय ने सख्त रवैया अपनाया है, साथ ही कचरे को रिसाइकल करने पर भी सरकार गंभीर है।

गौरतलब है कि चीन ने 1980 के दशक में कच्चे माल के स्रोत के रूप में ठोस कचरे का आयात करना शुरू किया था। इस तरह चीन दशकों तक चीन  ठोस कचरे का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश रहा है।

साभार-चाइना मीडिया ग्रुप

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