नई दिल्ली। नेपाल में आज सुबह अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। तिब्बत की ओर से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा जिले में देखने को मिला। नदी किनारे बसे इलाकों में पानी भरने से घर, सडक़ें, पुल और दूसरी जरूरी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। रॉयटर्स के मुताबिक बाढ़ की चपेट में आने से कम से कम 100 लोगों के शव बरामद हुए हैं जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रसुवा में आई बाढ़ स्थानीय इलाके में हुई बारिश की वजह से नहीं आई। माना जा रहा है कि तिब्बत की ओर हुई भारी बारिश या हिमस्खलन के कारण नदी में अचानक पानी बढ़ा होगा। हालांकि, बाढ़ की सही वजह अभी साफ नहीं हुई है और इसकी जांच की जा रही है। अचानक आई बाढ़ ने नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त या तबाह हो गई हैं।

भारत में नेपाल के दूतावास ने बाढ़ को लेकर ताजा बयान जारी करते हुए कहा कि नेपाल में बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ से लोगों की जान गई है, कई लोग लापता हैं और घरों, सडक़ों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं समेत कई जरूरी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। नेपाली दूतावास के मुताबिक, नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों, आपदा प्रबंधन टीमों, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह राहत और बचाव के काम में लगाया गया है। लोगों को सुरक्षित निकालने, तलाशी और बचाव अभियान चलाने, जरूरी चिकित्सा सहायता देने और राहत पहुंचाने का काम जारी है। नेपाल के अधिकारी नदियों के जलस्तर और निचले इलाकों में आगे बाढ़ के खतरे पर लगातार नजर रख हुए हैं। दूतावास ने कहा कि फिलहाल हालात तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में मृतकों, लापता लोगों और नुकसान से जुड़ी पूरी जानकारी की पुष्टि की जा रही है।
नेपाल सरकार ने दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से मिल रहे मदद के प्रस्तावों का स्वागत किया है। दूतावास के मुताबिक, अगर विदेशी मदद की जरूरत पड़ती है तो नेपाल सरकार काठमांडू से इसे तय और समन्वित करेगी। भारत में नेपाल का दूतावास भी नेपाल सरकार के संपर्क में है और जरूरत पडऩे पर भारत सरकार के साथ समन्वय में मदद के लिए तैयार है।
291 विदेशी पर्यटक लापता, 105 भारतीय भी शामिल
नेपाल पर्यटन विभाग के मुताबिक बाढ़ के बाद 291 विदेशी पर्यटकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों और बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी जुटाई जा रही है और आंकड़ों की पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे भोटे कोशी नदी में अचानक पानी बढ़ गया। इसके बाद रसुवा और धादिंग के साथ-साथ नुवाकोट जिले के कई इलाके प्रभावित हुए। रसुवा और धादिंग तिब्बत की सीमा के पास स्थित हैं, जबकि नुवाकोट काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में है।
लगातार पिघल रही होती हैं बर्फ की विशाल चट्टानें
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालय जैसी ऊंची पहाड़ी इलाकों में बर्फ की विशाल चट्टानें लगातार पिघल रही होती हैं। यह पिघला हुआ पानी अक्सर ग्लेशियर के पास ही एक प्राकृतिक झील का रूप ले लेता है। अब जब यह झील किसी वजह से अचानक फट जाती है तो उसमें जमा पूरा पानी एक ही झटके में नीचे की तरफ बह आता है। इसी घटना को वैज्ञानिक भाषा में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है.







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