Sau mein sattar aadmi
कला संस्कृति

हां मैं मजबूर हूं बेबस, बेसहारा घर से दूर…

By Harish हां मैं मजबूर हूं बेबस, बेसहारा घर से दूर फिर से आज ग़रीबी में मजबूर हूं मैं मजदूर हूं। यादों में समाए हुए मेरे वो अपने कुछ धुधले धुधले से हो गए मेरे सपने सपने मिटाने को मजबूर हूं मैं मजदूर हूं। मायूस हूं नम आखों से कैसे व्यक्त करू उदगार मन की […]