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कला संस्कृति

कोरोना में बहना का ‘रोना’, न आया भाई न ही भिटौली

by Digvijay Bisht अल्मोड़ा। जो भागी जियाला ईजू नौ रितु सुण ल वे, गयो रे मनखा ईजु काँ रितु सुणौ ल वे ……. (जो जीवित रहेगा वो ऋतुओं को देखेगा, जो व्यक्ति चला गया वो ऋतुओं को कहां देखेगा) जब यह रचना रची गई होगी तब रचनाकार ने बहुत आगे की सोची होगी। संभव है […]