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अब चाँद से बस कुछ ही कदम दूर है चंद्रयान-3, इसरो रचेगा इतिहास

क्या चांद के साउथ पोल पर उतरने वाला पहला देश बन पाएगा इंडिया ?

By Anil Pandey

भारत इतिहास रचने से कुछ ही कदम दूर है। इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल अगर चाँद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने में कामयाब रहा तो यह एक अविस्मरणीय पल होगा। जिस पर न केवल भारत बल्कि दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं। ऐतिहासिक और अविस्मरणीय इसलिए भी क्योंकि आज तक चाँद के सबसे मुश्किल क्षेत्र यानी दक्षिणी ध्रुव पर किसी भी देश का मिशन नहीं पहुंच सका है। इसरो के मुताबिक बुधवार शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रयान-3 चाँद की सतह पर पहुंचेगा। इसका दूरदर्शन चैनल पर सीधा प्रसारण किया जाएगा। हालांकि यह मॉडयूल पिछले कुछ समय से चाँद की तस्वीरें भेज रहा है, जिससे वैज्ञानिकों और आम लोगों की उत्सुकता और ज्यादा बढ़ गयी है।

चाँद का दक्षिणी ध्रुव अब तक पूरे विश्व के लिए जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है, आज तक इस क्षेत्र को किसी ने नहीं देखा है। इस बीच रूस द्वारा भेजे गये मिशन लूना-25 ने क्रैश लैंडिंग की। अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ताकत रहे रूस ने 47 साल बाद यह कोशिश की थी, जिसमें वह असफल रहा। ऐसे में इस मिशन की चुनौती को समझा जा सकता है, जो इसरो और भारतीय वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं होगी। इससे पहले 2019 में इंडिया का च्रंद्र मिशन असफल हो गया था। इसरो के वैज्ञानिकों के लिए यह पिछली गलतियों को सुधारने का अवसर भी होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार वे पहले से ज्यादा तैयार और सक्षम हैं, ऐसे में चंद्रयान-3 सॉफ्ट लैंडिंग करने की उपलब्धि हासिल कर लेगा।

कहा जा रहा है कि चंद्रयान-3 का लैंडर बुधवार यानी आज शाम 5 बजकर 45 मिनट पर चाँद की ओर बढ़ना शुरू करेगा और कुछ ही देर बाद यानी 6 बजकर 4 मिनट पर इसकी सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश की जाएगी। बता दें कि अगर चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग सफल रही तो रोवर प्रज्ञान उससे बाहर निकल जाएगा। इसके बाद वह चाँद पर चहलकदमी करते हुए वहां मौजूद पानी और वातावरण की तस्वीरें आदि लेकर सटीक जानकारी देगा। जिसका पूरे अंतरिक्ष विज्ञान जगत को इंतजार है। माना जा रहा है कि चाँद पर पानी या बर्फ के साथ-साथ अन्य प्राकृतिक संसाधन भी मौजूद हो सकते हैं।

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पिछली बार क्यों हो गया इसरो का मिशन फ़ेल

1. लैंडर की अनियंत्रित स्पीड के कारण लैंडर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया था। ऐसे में इस बार लैंडर की रफ्तार को कंट्रोल में रखने की चुनौती इसरो के वैज्ञानिकों के समक्ष होगी।

2. इसके साथ ही यह भी जरूरी होगा कि लैंडर चाँद की सतह पर उतरते समय सीधा रहे

3. जहां लैंडर को उतरना है कि वह बेहद असमतल और ऊबड़-खाबड़ जगह है, जहां चट्टानें और खाईयां मौजूद हो सकती हैं। छोटी सी गलती भी मिशन को असफल बना सकती है।

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