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महाशिवरात्रि पर जानिए भगवान शिव के कुछ रहस्य

By Aashish Pandey

भगवान शिव और माता पार्वती की शादी की सालगिरह को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। कहते हैं कि भगवान शिव के विवाह में न सिर्फ देवी देवता, बल्कि असुरों की पूरी बारात थी। आइए शिवरात्रि पर जानें शंकर भगवान से जुड़े कुछ रहस्य।

जब पार्वती क्रोधित हो गईं
पार्वती से विवाह से पहले भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेने की सोची। भोलेनाथ ने ब्राह्मण का रूप धारण किया और पार्वती के पास पहुंच गए, उन्होंने पार्वती से कहा वह भगवान शिव जैसे भिखारी से विवाह क्यों करना चाहती हैं। यह सुनकर पार्वती क्रोधित हो गईं, उन्होंने कहा कि वह शिव के सिवा किसी और से विवाह नहीं करेंगी। यह सुनकर भगवान शिव प्रसन्न हो गए। अपने असली रूप में सामने आकर पार्वती से विवाह के लिए राजी हुए।

आखिए क्यों आए मां काली के चरणों में
आपने मां काली के चरणों के नीचे भी महादेव की मुस्कुराते हुए कलैंडर खूब देखे होंगे। लेकिन भगवान शिव क्रोध और उग्रता के प्रतीक हैं फिर भी वह उदार रूप में कैसे। कहते हैं एक बार जब मां काली क्रोध अवस्था में सर्वनाश की ओर बढ़ रही थीं तो कोई भी देवता उन्हें रोकने में समर्थ नहीं था। तब सभी ने काली को रोकने के लिए सामूहिक रूप से भगवान शिव का स्मरण किया। वह जहां जहां कदम रखतीं, वहां विनाश होना तय था। तब भगवान शिव ने उनके कदमों के नीचे आकर उन्हें सर्वनाश करने से रोका था।

अमरनाथ गुफा से जुड़े रहस्य
भगवान शिव के भक्तों के लिए अमरनाथ गुफा बहुत महत्वपूर्ण है। जब मां पार्वती ने भगवान शिव से अमरता का रहस्य बताने के लिए कहा तो वह गुफा की ओर निकल गए। भगवान शिव पहलगाम से होते हुए गुफा तक पहुंचे थे। कहते हैं कि उन्होंने गुफा जाने वाले रास्ते में कई कार्य किए, इसीलिए गुफा जाने का पूरा रास्ता चमत्कारिक माना जाता है।

भगवान विष्णु को भेंट किया सुदर्शन चक्र
भगवान विष्णु के हाथ में हमेशा सुदर्शन चक्र रहता है, इस चक्र को भगवान शिव ने ही विष्णु को दिया था। एक बार भगवान विष्णु शिव की आराधना कर रहे थे। भगवान विष्णु ने भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए एक हजार कमल रखे थे। भोलेनाथ ने विष्णु की भक्ति की तत्परता को देखने के लिए एक कमल उठा लिया। भगवान विष्णु शिवलिंग पर कमल का फूल चढ़ा रहे थे, जब विष्णु 1000वां नाम ले रहे थे तो शिवलिंग पर अर्पित करने के लिए कोई भी फूल नहीं बचा था। तब भगवान विष्णु ने अपनी आंख निकालकर शिव को शिव को अर्पित कर दी। कमल के बजाय नेत्र अर्पित करने के चलते भगवान विष्णु को कमलनयन कहा गया है। अटूट भक्ति देखकर भगवान शिव ने भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र भेंट कर दिया।

शरीर पर भस्म लगाने की वजह
भगवान शंकर पूरे शरीर पर भस्म लगाए रहते हैं। शिवभक्त माथे पर भस्म का तिलक लगाते हैं, शिव पुराण के अनुसार एक संत तपस्या करके शक्तिशाली बन गया था। वह केवल फल और हरी पत्तियां खाता था। इसलिए उनका नाम प्रनद पड़ गया । अपनी तपस्या के जरिए उस साधु ने जंगल के सभी जीव जंतुओं पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था। एक बार वह अपनी कुटिया की मरम्मत के लिए लकड़ी काट रहा था तभी उसकी अंगुली कट गई।

साधु ने देखा कि अंगुली से खून के बजाए पौधे का रस निकल रहा है। यह देखकर वह घमंड से भर गया। वह खुद को दुनिया का सबसे पवित्र शख्स मानने लगा। यह देखकर भगवान शिव ने बूढ़े का रूप धारण किया और साधु के पास पहुंच गए। बूढ़े के भेष में भगवान शिव ने साधु से पूछा कि वह इतना खुश क्यों है। साधु ने सारी कहानी बता दी। उन्होंने कहा ये पौधों और फलों का रस ही तो है लेकिन जब पेड़ पौधे जल जाते हैं तो वह भी राख बन जाते हैं। अंत में केवल राख ही बचती है।

 शिव ने अपनी अंगुली काटकर दिखाई और उससे राख निकली, साधु को एहसास हो गया कि उनके सामने स्वयं भगवान खड़े हैं। साधु ने भगवान शिव से क्षमा मांगी। कहा जाता है कि तब से ही भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म लगाने लगे। ताकि भक्त अंतिम सत्य को याद रखें।



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