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चीन में क्यों हो रही है नए शिक्षा कानून की चर्चा?

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चीन में अकसर परिजनों को यह कहते हुए सुना जाता है कि उनके बच्चों के ऊपर पढ़ाई का बहुत बोझ है। ऐसे में बच्चों के पास खेलने या मनोरंजन का बिलकुल भी समय नहीं रहता है। लेकिन हाल के दिनों में चीन सरकार ने इस संबंध में कानून पारित किया है। इसका मकसद तनाव से जूझ रहे परिजनों व बच्चों के चेहरों पर खुशियां लौटाना है। यह चीन की सर्वोच्च संस्था द्वारा उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। जिसकी कई विशेषज्ञों व जानकारों ने तारीफ की है। क्योंकि चीन में स्कूल में छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ घर के लिए बहुत ज्यादा होमवर्क मिलता है। जिसके कारण उनके पास खेलने-कूदने का समय नहीं रहता है। लेकिन अब उनकी चिंताएं काफी हद तक दूर होने वाली हैं।

बताया जाता है कि यह नया कानून 1 जनवरी, 2022 से लागू हो जाएगा, जिसका सीधा असर बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों पर पड़ेगा। इस फैसले का बच्चों के माता-पिता ने स्वागत किया है। चाइना यूथ डेली के हालिया सर्वेक्षण में भी इसकी पुष्टि हुई है। सर्वे के अनुसार लगभग 94.7 प्रतिशत चीनी माता-पिता इस कानून को लेकर बहुत आशावान और उम्मीद से भरे हैं। उनका मानना है कि चीन सरकार ने अक्तूबर महीने में पारिवारिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जो कानून पारित किया है, उससे उनकी चिंता कम करने में मदद मिलेगी। यहां बता दें कि इस सर्वेक्षण में 1,149 लोगों ने हिस्सा लिया था, इनमें से 77.5 फीसदी के घरों में एक छोटा बच्चा मौजूद है, जबकि शेष उत्तरदाताओं के पास दो या अधिक बच्चे हैं।

सर्वे में यह भी कहा गया है कि, साक्षात्कार में शामिल अधिकांश लोगों ने माना कि उनकी नज़र हाल में पारित हुए कानून पर लगी हुई थी। इनमें से करीब 61.4 प्रतिशत ने कहा कि वे अपने बच्चों पर अत्यधिक शैक्षणिक बोझ न डालने के लिए माता-पिता की जिम्मेदारियों को निर्धारित करने वाले प्रावधान से चिंतित हैं। साथ ही, 58.8 फीसदी ने कहा कि वे उस प्रावधान पर अधिक ध्यान दे रहे हैं जिसके लिए परिजनों को अपने बच्चों को इंटरनेट की लत से बचाने में अपनी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। ध्यान रहे कि बच्चों की पढ़ाई का बोझ कम करने के साथ-साथ चीन सरकार उनसे इंटरनेट व मोबाइल गेम्स की अत्यधिक आदत भी छुड़ाना चाहती है।

गौरतलब है कि शिक्षा प्रोत्साहन संबंधी कानून गत 23 अक्टूबर को पारित हुआ था। इसके अनुसार नाबालिगों के अभिभावकों को बच्चों के अध्ययन, आराम, मनोरंजन और शारीरिक व्यायाम के लिए उचित समय का प्रबंधन करने की जरूरत होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रावधान बेहत लक्षित और व्यावहारिक महत्व का है। लेकिन कानून का सही ढंग से पालन हो, इसके लिए और अधिक उपाय करने होंगे।

कहा जा सकता है कि चीन सरकार द्वारा पारित किए गए इस कानून का बच्चों के भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। क्योंकि, बच्चों का बचपन खुशहाल होगा तो उनका भविष्य व आगे की ज़िंदगी बेहतर हो सकेगी।

 

साभार- अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप

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