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वित्त मंत्री ने पेश किया आम बजट, लोकलुभावन योजनाओं से परहेज, सुधार एक्सप्रेस को जारी रखने की घोषणा

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 लगातार नौवां बजट पेश कर बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करते हुए लोकलुभावन योजनाओं से परहेज किया और ‘सुधार एक्सप्रेस’ को जारी रखने की घोषणा की। सीतारमण ने अपना लगातार रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करते हुए किसानों, युवाओं और छोटी कंपनियों पर विशेष ध्यान देने के साथ अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बुनियादी ढांचे पर जोर दिया और सुधारों का खाका पेश किया। उन्होंने विनिर्माण पर जोर देने के साथ पूंजीगत व्यय लक्ष्य बढ़ाकर 1.2 लाख करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया जो चालू वित्त वर्ष के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये है। केन्द्रीय वित्त मंत्र ने शहरी विकास के लिए पिछली बार की तुलना में काफी कम पैसा रखा है। इसके लिए आवंटन करीब 12 फीसदी कम कर दिया गया है। गांवों के विकास पर पिछली बार से थोड़ा ज्यादा ध्यान देते हुए आवंटन करीब दो फीसदी बड़ाया गया है।

बजट आवंटन को देख कर लगता है कि आने वाले वित्त वर्ष में सरकार का सबसे ज्यादा जोर ऊर्जा सेक्टर पर रहेगा। क्योंकि इस मद में आवंटन सबसे ज्यादा 34 प्रतिशत बढ़ाया गया है। आईटी और टेलीकॉम के लिए आवंटन में सबसे ज्यादा, 22 फीसदी की कटौती की गई है।

वित्त मंत्री ने लगभग सवा घंटा के अपने बजट भाषण में सुधारों का खाका पेश करते हुए विकसित भारत के लिए बैंकों को तैयार करने को लेकर एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का भी प्रस्ताव किया। उन्होंने वृद्धि के प्रमुख इंजन के रूप में एमएसएमई के महत्व को रेखांकित करते हुए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास कोष का प्रस्ताव रखा। इसका मकसद क्षेत्र में भविष्य के चैंपियन तैयार करना और उद्योगों को प्रोत्साहन देना है। बजट का ताना-बाना तीन कर्तव्यों यानी आर्थिक वृद्धि को गति देने, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और सबका साथ, सबका विकास के इर्द-गिर्द बुना गया है। बजट में किसानों की आय बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य से 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का विकास करनेए, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मजबूती प्रदान करने तथा स्टार्टअप एवं महिलाओं की अगुवाई वाले समूह को मत्स्य कृषक उत्पादक संगठनों के साथ शामिल करते हुए बाजार से जोडऩे का प्रस्ताव किया गया है।

सीतारमण ने तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों में सहायता प्रदान कर उच्च मूल्य वाली खेतीबाड़ी पर जोर दिया। बजट में आयकर की दरों एवं संरचना के मोर्चे पर कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। इसमें राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026-27 में 4.3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य रखा गया है जो चालू वित्त वर्ष के 4.4 प्रतिशत के अनुमान से कम है। इसमें कर्ज जीडीपी अनुपात को 2026-27 में घटाकर 55-6 प्रतिशत पर लाने का प्रस्ताव है जो चालू वित्त वर्ष में 56.1 प्रतिशत है। बजट में आगामी वित्त वर्ष के लिए 53.5 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान है। शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है जबकि बाजार से उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना जतायी गयी है।

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