नई दिल्ली। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष्य में अपने उद््बोधन में कहा कि भारत सांस्कृतिक दृष्टि से सर्वदा व सर्वथा अखण्डित है। उन्होंने माननीय प्रधान मन्त्री के विकसित भारत के संकल्पों को उद्धरित करते यह भी कहा कि इसका लक्ष्य न केवल भारत, अपितु समग्र विश्व का कल्याण है।
मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित राष्ट्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय तिरुपति के माननीय कुलपति प्रो जीएसआर कृष्ण मूर्ति ने भारत की स्वतन्त्रता में छत्रपति शिवाजी, वीर पृथ्वीराज, महर्षि अरविन्द, लोकमान्य तिलक व महात्मा गांधी आदि महापुरुषों के योगदानों की चर्चा की और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत’ स्वतन्त्रत – भारतम् ‘ नामक स्वरचित एक संस्कृत कविता का सस्वर पाठ भी किया।
अखिल भारतीय चेस संघ के उपाध्यक्ष तथा टी टी डी भक्ति चैनल के निदेशक डा डी पी अनन्त ने कहा कि स्वतन्त्रता सेनानियों ने अपने प्राण त्याग कर हमें जो स्वतन्त्रता दी है उस बीज का संरक्षण बहुत ही आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन प्रो मधुकेश्वर भट ने किया ।







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