ट्रेड यूनियन ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर यूनियन का गदरपुर ब्लॉक में सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और आशाओं के श्रम के शोषण पर रोक लगाने की मांग के साथ ब्लॉक की नई कमेटी का गठन किया गया।
ब्लॉक सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियन ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री के.के. बोरा ने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारें स्वास्थ्य विभाग के विभाग के जमीनी स्तर के काम आशा वर्कर्स से कराती हैं। उनका काम किसी भी राज्य कर्मचारियों के काम से कम नहीं है। उसके बावजूद एक्टू द्वारा कई वर्षों से राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान करने की मांग को सरकार अनसुना कर रही हैं। भाजपा सरकार आने के बाद तो श्रम कानून में श्रमिक विरोधी बदलाव हुए हैं। नए लेबर कोड्स में भी आशाओं को श्रमिक नहीं माना गया है। जिस कारण वे न्यूनतम वेतन पाने के हक से भी वंचित हंै। आशा वर्कर्स सहित तमाम श्रमिक वर्ग के यूनियनबद्ध होने के अधिकार को भी मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए लेबर कोड्स में खत्म कर दिया गया। इन लेबर कोड्स के लागू होने के बाद सरकार के झूठ का पर्दाफाश हुआ है। भाजपा सरकार द्वारा गुमराह किए गए मजदूर पूरे देश में काम के घंटे काम करने और मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर सडक़ों पर उतरे। लेकिन श्रमिक विरोधी भाजपा सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान देने के बजाय के आंदोलन का दमन ही किया।
उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष और जिला सचिव रीता कश्यप ने कहा कि ऐक्टू के नेतृत्व में बनी उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर यूनियन ने आशा वर्कर्स की समस्याओं को पहचानते हुए उनके संघर्ष को आगे बढ़ाया और आशा वर्कर्स और उनकी मांगो को सरकार के समक्ष मुख्य मुद्दा बनाने का काम किया है। ऐक्टू के नेतृत्व में आशाओं ने अपनी ताकत को पहचाना है और संगठित होकर बड़े-बड़े आंदोलनों से सरकार को इस ताकत का एहसास कराया है। तभी तमाम सरकारें आशाओं के लिए अक्सर घोषणाएं करते रहती हैं। आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और न्यूनतम वेतन देने की मांग को ऐक्टू के नेतृत्व में ही एकताबद्ध और संगठित संघर्षों से हासिल किया जा सकता है।
जिला अध्यक्ष ममता पानू ने कहा कि आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाता लेकिन इसके विपरीत आशाओं पर काम का बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है परंतु न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा से आशायें वंचित हैं। इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ मजदूरों के मजबूत संगठन और बड़े पैमाने के एकताबद्ध संघर्ष की आवश्यकता है।
यूनियन की जिला उप सचिव अनीता अन्ना ने कहा कि देशभर में लाखों महिला स्कीम वर्कर सरकारी योजनाओं में कार्यरत हैं। लेकिन मैं अपने अधिकारों से वंचित हैं। सरकार लगातार उनका शोषण कर रही है। प्रदेश भर में 12 हजार से अधिक कार्यरत आशा वर्कर्स पर सरकार रोज नए-नए काम थोप रही है। सरकार और प्रशासन की नाकामी से स्वास्थ्य विभाग के चरमराए ढांचे के कारण आमजन परेशान है। प्रशासन अपनी ढांचे को दुरुस्त करने के बजाय सारा जिम्मा आशा वर्कर्स के ऊपर डाल देता है। उनकी छोटी-मोटी गलतियों में भी उन्हें काम से निकाल देना आम बात हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण कार्यकर्ता होने के बावजूद उनके मान-सम्मान तक का ध्यान नहीं रखा जाता।
सम्मेलन में 13 सदस्या कमेटी का गठन किया गया जिसमे काजल मिस्त्री ब्लॉक अध्यक्ष, सरिता कश्यप ब्लॉक उपाध्यक्ष, काजल मिस्त्री ब्लॉक सचिव, लक्ष्मी देवी कोषाध्यक्ष, पूजा ब्लॉक उपसचिव, नधि, प्रेमलता, सुरेंद्र कौर, कला राणा, प्रीति रस्तोगी, फातिमा, देवेंद्र कौर,ए राधा आदि की सदस्या कार्यकारणी से 5 पदाधिकारी चुने गए।
ब्लॉक सम्मेलन मेें बाजपुर ब्लॉक कोषाध्यक्ष जीत कौर, सपना भट्ट, गौरी विश्वास, हेमा बिष्ट, तारा भट्ट, नाजरा बी, जसविंदर कौर, पूर्व जिला सचिव कुलविंदर कौर, मनीषा्र, देवकी, वंदना, निधि, सायरीन, नीलम रानी, पुष्पा देवी, लक्ष्मी रावत, नीलम रानी, आरती, माया, पूजा रानी, सबीना, प्रीति, कमलेश, मंजु नेगी, शमीम जहां, राधा रानी, शकुंतला, आशा देवी, कश्मीर कौर, नीलिमा सुमन देवी, तीर्थमनी, विमला रानी, अमरजीत कौर व अन्य आशाएं मौजूद रहे।







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