देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित की जाने वाली सामाजिक विधवा पेंशन योजना का नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार किया है। राज्य के समाज कल्याण मंत्री खजान दास के अनुसार राजस्थान के अध्ययन दौरे से लौटने के बाद इस योजना का नाम बदलकर ‘मुख्यमंत्री एकल नारी पेंशन योजना’ करने की तैयारी चल रही है। इस बदलाव का उद्देश्य योजना को अधिक समावेशी, व्यापक और सम्मानजनक पहचान देना है।
समाज कल्याण मंत्री का कहना है कि विधवा शब्द सामाजिक दृष्टिकोण से उचित नहीं लगता। महिलाओं को सम्मानजनक पहचान देने के उद्देश्य से राजस्थान में पेंशन योजना को एकल नारी पेंशन नाम दिया गया है। इसी मॉडल को उत्तराखंड में लागू करने पर विचार किया जा रहा है। समाज कल्याण मंत्री ने बताया कि उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर राजस्थान का अध्ययन दौरा किया था। वहां विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक और प्रस्तुतीकरण में उन्होंने उत्तराखंड में भी पेंशन योजना का नाम बदलने का अनुरोध किया। जिसे मुख्यमंत्री ने सहमति प्रदान करते हुए आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पारित कर इसे मंजूरी प्रदान करने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य एकल महिलाओं को सम्मानजनक पहचान देने के साथ उन्हें आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
इस योजना के तहत उन विधवाओं को मासिक पेंशन प्रदान की जाती है जिनकी पारिवारिक मासिक आय रु 4000 तक है या जो बीपीएल श्रेणी में आती हैं और किसी अन्य पेंशन योजना का लाभ नहीं उठा रही हैं।







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