पिता जी की डायरी है ‘होली गीत संग्रह’ – कुन्दन भैसोड़ा
नई दिल्ली। म्यर पहाड़ उत्तराखण्ड सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष एवं पश्चिमी विनोद नगर आरडब्ल्यूए के प्रधान कुन्दन भैसोड़ा की ओर से रविवार को दिल्ली के उत्तराखण्ड सदन में कुमाऊंनी होली संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अपने पिता स्व. श्री किशन सिंह भैसोड़ा की स्मृति में उनके होली गीतों के संकलन पर पुस्तक ‘होली गीत संग्रह’ का विमोचन भी किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ संचालक नीरज बवाड़ी के साथ होली गीत ‘सिद्धी के दाता विघ्न विनाशक’ होली गायन के साथ किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि के तौर पर उत्तराखण्ड प्रवासी राज्य मंत्री पूरन चन्द्र नैनवाल, दिल्ली पटपडग़ंज के विधायक रविन्द्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड संस्कृति साहित्य एवं कला परिषद, राज्य मंत्री मधु भट्ट व वरिष्ठ पत्रकार व मीडिया सलाहकार मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड मदन मोहन सती उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्कृति के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों एवं समितियों को सम्मानित किया गया।

म्यर पहाड़ उत्तराखण्ड सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष कुन्दन भैसोड़ा ने कहा कि उनके पिता जी स्व. श्री किशन सिंह भैसोड़ा जो कि पूर्व सैनिक के साथ ही एक कुशल वक्ता और रंगकर्मी भी रहे, उन्होंने अपनी डायरी में होली गीतों को लिखा था। ताकि ये होली गीत आने वाली पीढिय़ां भी सीख सकें। उनकी इस डायरी को आसपास के गांवों के लोग भी ले जाया करते थे। कुन्दन ने कहा कि उनके मन में विचार आया कि क्यों न इस होली डायरी को एक होली गीत संग्रह का रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि आज मुझे खुशी है कि पिता की स्मृति में उनके होली गीत संग्रह का का आज विमोचन हो रहा है।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विधायक रविंद्र सिंह नेगी ने कहा कि मुझे खुशी हुई कि कुन्दन भाई ने राजधानी दिल्ïली में होली संगोष्ठी का आयोजन किया। म्यर पहाड़ उत्तराखण्ड सांस्कृतिक समिति अपनी संस्कृति और बोली भाषा को पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास करती आ रही है। हम दिल्ली में भी अपने त्यौहारों को पूरे हर्षोल्लास और रीति रिवाज के साथ मनाएं तो और खुशी होगी। नेगी ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वे बहुत छोटे थे तो पिता जी के साथ अपने पहाड़ के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने जाया करते थे और उन्हें बचपन से ही अपनी संस्कृति से लगाव रहा है। उन्होंने कहा कि पटपडग़ंज की जनता ने उन्हें अपार प्यार दिया है और वे जनहित के कार्य करते रहेंगे।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उत्तराखण्ड प्रवासी राज्य मंत्री पूरन चन्द्र नैनवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री की ओर से सभी उत्तराखण्डवासियों, विशेशकर प्रदेश से बाहर निवास कर रहे प्रवासियो से आह्वान किया गया है कि वे अपनी संस्कृति, लोकपरंपराओ और पारंपरिक वेशभूषा को सहेजकर रखें और नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोडऩे का संकल्प लें। उन्होंने अपनी बोली भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सरकार लघु फिल्में बनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के गांवों को बचाने के लिए हमें गावों से जुडऩा होगा।
उत्तराखण्ड संस्कृति साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष, राज्य मंत्री मधु भट्ट ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड सरकार संस्कृति के क्षेत्र में लगातार अच्छा काम कर रही है। राज्य सरकार संस्कृति के संवद्र्धन और संरक्षण के लिए प्राथमिकता के तौर पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कुमाऊं की होली अपना विशेष स्थान रखती है।
वरिष्ठ पत्रकार व मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मदन मोहन सती ने होली के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुमाऊं की होली गीतों से भी यह प्रतीत होता है कि यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण की स्थली भी रही है।
संगोष्ठी को वरिष्ठ साहित्यकार पूरन चन्द्र काण्डपाल, वरिष्ठ रंगकर्मी हेम पंत, वरिष्ठ रंगकर्मी व संगीतकार शिवदत्त पंत, समाजसेवी सुरेंद्र हल्सी, अधिवक्ता भुवन भट्ट, हिमाल कैसेट्स के निर्देशक चन्दन भैसोड़ा ने भी संबोधित किया। सभी ने बीते सालों की होलियों को याद करते हुए दिल्ली में भी होली को उसी अंदाज में मनाए जाने पर जोर दिया और कहा कि यह पुस्तक का विमोचन अपनी जड़ो से जुड़े रहने और नई पीढ़ी तक इस लोक धरोहर को पहुंचाने का एक संकल्प भी है। होली संगोष्ठी और पुस्तक विमोचन के दौरान मौजूद लोगों ने कुमाऊंनी होली गीत गाकर गांव की होली की याद दिला दी।







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