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दिल्ली में गंभीर प्रदूषणः प्रदूषण से निपटना चीन से सीखे भारत

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Anil Pandey, Beijing

भारत की राजधानी दिल्ली लंबे समय से प्रदूषण की मार झेल रही है। हालत यह है कि दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से ऊपर पहुंच गया है। हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब दिल्ली की हवा में इतना ज़हर घुल रहा है। हर साल लगभग यही स्थिति होती है, तमाम दावों और घोषणाओं के बाद भी स्थिति में सुधार नजर नहीं आता है। जिसके कारण स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए दिल्ली की हवा बहुत खराब है। इसके लिए पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आधिकारिक रूप से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान(ग्रैप 3) लागू कर दिया गया है।

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अगर हम दिल्ली की तुलना पड़ोसी देश चीन की राजधानी बीजिंग से करें तो यहां पर आसमान साफ रहता है और एक्यूआई आमतौर पर 30-50 के बीच में होता है। लोग पार्कों में घूमते और व्यायाम करते हैं। बड़ा महानगर होने और बड़ी आबादी के बावजूद स्वच्छता देखते ही बनती है। हालांकि कुछ साल पहले तक बीजिंग में भी प्रदूषण और धुंध आम बात थी। लेकिन सरकार और लोगों के गंभीर प्रयासों से आज बीजिंग व आसपास के शहरों में लोग स्वच्छ हवा और वातावरण में सांस ले रहे हैं। जब मैं यह लेख लिख रहा हूं, उस दौरान चीन के अधिकांश शहरों में एयर क्वालिटी का स्तर 20 से 80 के बीच है। आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि चीन और भारत के हालात में कितना अंतर है।

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एक ओर दिल्ली व आसपास के इलाकों में स्थिति नियंत्रण से बाहर है, जबकि चीनी नागरिक स्वच्छ हवा का आनंद ले रहे हैं। चीन ने ऐसा क्या किया कि प्रदूषण काबू में आ गया। इसके लिए हमें यह जानना होगा कि चीन ने प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया। क्योंकि प्रदूषण से लोगों का स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है, साथ ही पर्यटन और अर्थव्यवस्था भी इसकी मार झेलती है। ऐसे में चीन सरकार ने इसे राष्ट्रीय आपदा के रूप में लिया और सख्त उपाय किए। जाहिर है कि सिर्फ सरकार के कदम उठाने से ही समस्या हल नहीं होती, इसके लिए आम नागरिकों को भी जागरूक किया गया। लोगों ने सरकार का पूरा साथ दिया और आज नतीजा सामने है। बता दें कि बीजिंग में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तमाम कारखानों को बंद करने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही आसपास के शहरों में भी नवीन ऊर्जा आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया गया। इसके लिए सरकार ने अरबों रुपए खर्च किए, ताकि स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल हो और उससे पर्यावरण को लाभ मिले। बीजिंग में मौसम काफी ठंडा होता है और पारा शून्य से नीचे भी चला जाता है। ऐसे में घरों में सेंट्रलाइज्ड हीटिंग की व्यवस्था होती है। जो आमतौर पर कोयले से संचालित प्लांट से चलती थी। लेकिन चीन सरकार ने इस बारे में भी कड़ा निर्णय लिया और कोयले का इस्तेमाल बंद कर दिया। इसका सीधा असर हवा की गुणवत्ता में सुधार के रूप में देखा गया।

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इसके अलावा पेट्रोल व डीजल चालित वाहन भी कम प्रदूषण नहीं फैलाते। इस दिशा में भी चीन में गंभीरता से सोचा गया। आज चीन दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक कार बाजार व उत्पादक देश बन गया है। चीन में स्वच्छ ऊर्जा चालित कारों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी इससे संचालित होता है। साथ ही कारों के लिए ऑड-इवन नियम सालों से लगातार काम कर रहा है। जबकि पुराने वाहनों (प्रदूषण के लिए जिम्मेदार) को सड़कों पर दौड़ने की इजाजत नहीं होती है।
अन्य कदमों की बात करें तो चीन में निर्माण स्थलों पर धूल आदि बिल्कुल नहीं उड़ती है। जब कोई बिल्डिंग बनती है, तो उसे पूरी तरह कवर किया जाता है, ताकि उसका आसपास के इलाके पर कोई असर न हो। साथ ही देर रात को पानी से सड़कों की धुलाई भी होती है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है।

एक ओर सरकार ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए उक्त उपाय किए, वहीं पार्कों और हरे-भरे स्थानों में इजाफा किया गया। बीजिंग की बात करें तो हर कॉलोनी में बड़े और सुंदर पार्क बनाए गए हैं,, जबकि झीलों की संख्या भी कम नहीं है। स्थानीय सरकार व प्रबंधन इस बात का पूरा ध्यान रखता है कि शहर में हरियाली पर्याप्त रहे, इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इन सब के रखरखाव का काम जिम्मेदारी से किया जाता है। जाहिर सी बात है कि अगर किसी देश और शहर में इतनी शिद्दत से किसी समस्या से निपटने के लिए प्रयास किए जाएंगे तो उसका परिणाम जरूर सामने आएगा। चीन के बारे में कहा जा सकता है कि यहां पर सरकार और लोग बयानबाज़ी में नहीं एक्शन में विश्वास रखते हैं। इसी के कारण चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन पाया है।

दिल्ली व भारत के अन्य शहरों को चीन से सीख लेने की जरूरत है, क्योंकि स्वच्छ हवा में सांस लेना हर नागरिक का अधिकार है। इसके लिए संबंधित सरकारों को सख्त कदम उठाने ही होंगे। वरना दिल्ली को गैस चैंबर से छुटकारा दिलाने का कोई उपाय नजर नहीं आता है।

(लेखक चाइना मीडिया ग्रुप में वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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