देहरादून। भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले आशा फैसिलिटेटर एवं कार्यकर्ता संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। आशा फैसिलिटेटर एवं कार्यकर्ता संगठन ने जिलाधिकारी कार्यालयों में धरना प्रदर्शन करके उतराखंड सरकार को भी चेताया है। आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी 9 सत्रीय मांगों को लेकर शासन प्रशासन को अवगत कराया।
आशा फैसिलिटेटर एवं कार्यकर्ता संगठन जिलाधिकारी के माध्मय से प्रधानमंत्री को लिखे ज्ञापन में कहा गया है कि आशा फैसिलिटेटर राज्य सरकार के अधीन स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत वर्ष 2005 से अपनी सेवाएं दे रही हैं। वर्तमान में प्रदेश में 12,315 आशाओं का मार्गदर्शन 606 आशा फैसिलिटेटर द्वारा किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों की स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को जनमानस तक पहुंचाना, महिलाओं को स्वास्थ्य एवं प्रसव के संबंध में जागरूक करना, उन्हें स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना और बच्चों के टीकाकरण जैसे कार्य आशा फैसिलिटेटर द्वारा किया जाता है।
आशा फैसिलिटेटर प्रदेश संघ की महामंत्री व अखिल भारतीय आशा कर्मचारी संघ की उपाध्यक्ष रेनू नेगी का कहना है कि लंबे समय से वे अपनी नौ सूत्रीय मांगो के लिए लड़ रही है। लेकिन सरकार द्वारा आशा कार्यकर्ताओं के लिए आज तक कोई सकारात्मक कार्यवाही नही की गई। उन्होंने कहा कि उतराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों व दुर्गम स्थानों की महिलाओं को इस महंगाई के दौर में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।
ये हैं 9 सूत्रीय मांगें
1. आशा फैसिलिटेटरों को 25 दिन की मोबिलिटी के स्थान पर 30 दिन का निश्चित मानदेय दिया जाए।
2. फैसिलिटेटरों को स्टेशनरी व यात्रा भत्ता दिया जाए।
3. आशा बहनों की वृद्धि की अपेक्षा आशा फैसिलिटेटरों के अन्य भत्ते न्यून की जा रही हैं, जो न्यायपूर्ण नहीं है।
4. फैसिलिटेटरों को पीएलए एवं वीएचएसएनसी एवं महिला आरोग्य समिति बैठक का मानदेय 100 प्रति बैठक के स्थान पर 800 किया जाए। क्योंकि उन्हें बैठकों के लिए रिजर्व वाहनों से जाना पड़ता है।
5. फैसिलिटेटरों को सामाजिक सुरक्षा की दृष्टिगत नियमावली से अच्छादित किया जाए।
6. फैसिलिटेटर को सर्दी और गर्मी की वर्दी दी जाए।
7. फैसिलिटेटरों को राज्य कर्मचारियों की तरह अवकाश की सुविधा दी जाए।
8. आशा व फैसिलिटेटरों को पल्सपोलियो ड्यूटी का 100 रुपए प्रतिदिन के स्थान पर 600 रुपए किया जाए।
9. फैसिलिटेटरों को दुर्घटना या मृत्यु होने पर 10 लाख रुपए दिए जाएं।







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