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डिप्रेशन का इलाज है मुमकिन, बस कीजिए ऐसा…

अवसाद एक गंभीर समस्या है जिसे योगाभ्यास से ठीक किया जा सकता है। क्या आपको पता है कि डिप्रेशन का इलाज योग से है संभव है। जी हां, योग में अवसाद के लिए कई योगासन और प्राणायाम हैं। इस हफ़्ते हम आपको बताएंगे डिप्रेशन या अवसाद क्या होता है। योग के जरिए हम इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है ?
By Ashish Bahuguna, Beijing
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इस हफ़्ते भी हम आपको बताएंगे योग द्वारा डिप्रेशन या अवसाद का इलाज। उससे पहले आपको और जानकारी देंगे अवसाद के लक्षणों के बारे में। अवसाद से ग्रसित व्यक्ति आमतौर पर निम्न लक्षणों में से कुछ भी या फिर सभी का अनुभव कर सकता है: उदासी; निराशा या निराशावाद की भावनाएं, कम आत्मसम्मान और ऊंचा आत्म-मूल्यह्रास; सामान्य गतिविधियों में रुचि न लेना या कम रुचि लेना ऊर्जा की कमी या थकान में वृद्धि, बेकार या दोषी महसूस करना, सुस्ती, भूख में कमी या सामान्य से अधिक भोजन करना अनिद्रा या फिर बहुत अधिक नींद आना मौत या आत्महत्या के विचार निर्णय लेने में या सोचने में कठिनाई का सामना करना। अवसाद के ये लक्षण हल्के से गंभीर तक भिन्न हो सकते हैं। अवसाद समान्य उदासी या दुःख / शोक से भिन्न होता है और यदि ये लक्षण दो सप्ताह तक रहते हैं तो आपको निश्चित ही चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए।

शोक प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्राकृतिक और अवसाद के कुछ समान लक्षण साझा करता है। लेकिन उदास होना अवसाद (डिप्रेशन) नहीं है। क्योंकि दु:ख या शोक में, आत्म-सम्मान आमतौर पर वैसा ही सकारात्मक बना रहता है जबकि अवसाद (Major Depression ) में आत्मग्लानि और आत्म-घृणा की भावना आम होती है।

अवसाद के मुख्य कारक:

अवसाद के कई कारण हो सकते हैं, जो निम्न हैं:

1. जो लोग आसानी से तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं, जिनका आत्म-सम्मान कमज़ोर होता है, या जो आमतौर पर निराशावादी होते हैं, वे अवसाद का शिकार आसानी से हो सकते हैं।
2. अगर आपके परिवार में कोई अवसाद से ग्रस्त था तो सम्भव है आपके भी अवसाद से ग्रस्त होने संभावना बढ़ जाती है।
3. हिंसा, उपेक्षा, दुर्व्यवहार या गरीबी के लगातार संपर्क से भी लोग अवसाद की चपेट में आ सकते हैं।
4. मस्तिष्क के कुछ रसायनों के फेर-बदल भी अवसाद के लक्षणों में योगदान कर सकते है।
एक स्टडी के अनुसार महिलाओं में अवसाद के लक्षण और इससे ग्रस्त होने की सम्भावना भी अधिक है।
अवसाद (डिप्रेशन) में योग की भूमिका :
योग का अभ्यास सभी प्रकार के रोग में लाभदायक होता है। चाहे आपकी बीमारी शारीरक हो या फिर मानसिक , योगाभ्यास से दोनों तरह की बिमारियों से निजात पाया जा सकता है।

अवसाद के लिए योग

अवसाद के मुक्ति के लिए आप नीचे बताये हुए योगासन या पिछले सप्ताह के लेख में दिये हुए आसन भी कर सकते हैं और नीचे बताए गए प्राणायाम भी कर सकते हैं।

बलासन

इसके लिए, घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं, ताकि शरीर का सारा भाग एड़ियों पर आ जाए। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। आपकी चेस्‍ट थाई से छूनी चाहिए और माथे से फर्श छूने की कोशिश करें। 30-40 सेकेंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में आ जाएं। लेकिन ध्‍यान रहे कि गर्भवती महिलाएं या घुटने के रोग से पीड़ित लोग इसे ना करें।

अवसाद में प्राणायाम का महत्व :
प्राणायाम का अभ्यास अवसाद लक्षणों को कम करने में बहुत सहायक है। अनुलम-विलोम और भ्रामरी करने से कम समय में बहुत अच्छे परिणाम हैं।

अनुलोम विलोम

अपनी सुविधानुसार पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठ जाएं। दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से 4 तक की गिनती में सांस को भरे और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। तत्पश्चात दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और दायीं नासिका से सांस को बाहर निकालें।
– अब दायीं नासिका से ही सांस को 4 की गिनती तक भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें। इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट

भ्रामरी प्राणायाम

अपने मेरुदंड को बिलकुल सीधा और दोनों हाथो को बगल में अपने कंधो के समांतर फैलाए।
अब अपने हाथो को कुहनियो से मोड़ते हुए हाथ को कानों के समीप ले जाए।
दोनों हाथों के अंगूठो से दोनों कानों को बंद कर लें।
इस प्राणायाम में नाक से श्वांस भर कर धीरे-धीरे गले से भ्रमर की गुंजन के साथ श्वांस छोड़ना होता है, इसलिए पहले नाक से श्वास अंदर लें और फिर बाहर छोड़े।
इस बात का ध्यान रहे कि श्वास बाहर छोड़ते समय कंठ से भवरे के समान आवाज करना है। यह आवाज पूर्ण श्वास छोड़ने तक निरंतर निकालना है। और आवाज आखिर तक एक समान होना चाहिए।
ध्वनि तरंग को अपने मस्तिष्क में अनुभव करें व गुंजन करते वक्त जीभ को तालु से लगायें। दांतों को खुला रखें किन्तु होठ बंद रहना चाहिए। इसके अभ्यास को 5 से 10 बार तक करें।

श्वास लेने के लिए कोई अनुपात निर्धारित नहीं है अपने सामर्थ्य के अनुसार इसे भर सकते है। लेकिन जितनी श्वास लेते बने उतनी ही ले, अनावश्यक शरीर को तकलीफ ना दे।
शुरुआत में बिना कान बंद किये भी भ्रामरी प्राणयाम को किया जा सकता है।

पूरा अभ्यास आराम से करे। अभ्यास का आनंद ले।जितना आनंद लेंगे उतना अभ्यास रोज़ कर सकेंगे।अगर अभ्यास करते समय कोई परेशानी या फिर थकान लगे तो तुरंत शवासन में लेट जायें और आराम करे।

Physical benefits of Yoga

  • increased flexibility.
  • increased muscle strength and tone.
  • improved respiration, energy and vitality.
  • maintaining a balanced metabolism.
  • weight reduction.
  • cardio and circulatory health.
  • improved athletic performance.
  • protection from injury.

मिलते हैं, अगले सप्ताह, कुछ और आसनों के साथ। तब तक के लिए करते रहिए, आज बताए गए आसनों को।

लेखक जाने-माने योग शिक्षक हैं और मूल रूप से उत्तराखंड, ऋषिकेश के रहने वाले हैं। इसके साथ ही बीजिंग में वी-योग एकेडमी भी चलाते हैं।

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