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कोरोना वाइरस से बचने के लिए करें योग

भारतीय योग ने विश्व भर में अपनी पहचान बनाई है। चीनी लोग भी योग से बेहद लगाव रखते हैं। आजकल चीन में कोरोना वाइरस की वजह से योग प्रेमी योग केंद्रों में नहीं जा रहे हैं। हालांकि वे अपने घरों में ही योगाभ्यास करते हैं। इस बीच तमाम योग सेंटर ऑनलाइन क्लासेज़ ले रहे हैं, ताकि उनके योग स्टूड़ैंट्स का अभ्यास बाधित न हो।

By Ashish Bahuguna, Beijing


योगाभ्यास आपको स्वस्थ रखता है और इम्यूनिटी भी बढ़ाता है। इतना ही नहीं यह कोरोना वाइरस के खतरे से भी आपको बचाता है। वाइरस से बुरी तरह से प्रभावित मध्य चीन के वूहान शहर के वूहान फ़ंगचंग हॉस्पिटल में कोरोना वाइरस के मरीज़ों को भी योगाभ्यास करवाया जा रहा है। जिससे उन्हें काफ़ी राहत मिल रही है। अगर आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है तो कोरोना वाइरस के आपके शरीर में प्रवेश की संभावना कम रहेगी। अगर वाइरस किसी तरह शरीर में पहुंच भी गया तो आपके रिकवर होने की संभावना बहुत अधिक रहेगी।

यह वायरस बुजुर्गों, कैंसर पीड़ितों और छोटे बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इससे बचाव के लिए हमें नियमित रूप से योग करना चाहिए, ताकि हमारे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत बनी रहे। साथ ही जब भी घर से बाहर निकलें तो मॉस्क पहनना न भूलें। कोरोना वायरस से बचने के लिए प्राणायाम,भस्त्रिका, कपालभाति और अनुलोम-विलोम कारगर हो सकते हैं। ये योगासन इम्युनिटी को बूस्ट करते हैं। प्रतिरक्षा तंत्र, इम्युनिटी को स्ट्रांग करने के लिए तीन प्राणायाम हैं जो सब घर, ऑफिस  या फिर कहीं पर भी कर सकते हैं ।

शुरुआत में कपालभाती करते समय अगर एक मिनट में साठ बार सांस बाहर फेंकने में थकान हो, तो एक मिनट में तीस से चालीस बार सांस बाहर निकालें और अभ्यास बढ़ने के साथ साथ गति को प्रति मिनट साठ सांस तक ले जायें। कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास लंबे समय तक सही तरीके से करने पर इसकी अवधि पांच मिनट से पंद्रह मिनट तक बढ़ाई जा सकती है।

भस्त्रिका– अब अपने दोनों नासिका छिद्रों से एक गति से पूरी सांस अंदर लें। पूरी सांस अन्दर लेने के बाद, दोनों नासिका छिद्रों से एक गति से पूरी सांस को बाहर निकालें। सांस अंदर लेने और छोड़ने की गति “धौकनी” की तरह तीव्र होनी चाहिए और सांस को पूर्ण रूप से अन्दर और बाहर लेना चाहिए।
भस्त्रिका प्राणायाम करते वक्त जब सांस अंदर की और लें तब फेंफड़े फूलने चाहिए। और जब सांस बाहर त्याग करें तब फेंफड़े सिकुड़ने चाहिए।

भस्त्रिका प्राणायाम करते वक्त, श्वास अंदर लेने का समय और श्वास बाहर छोड़ने का समय एक समान रखना होता है। भस्त्रिका प्राणायाम करते समय सांस अंदर लेने का समय ढाई सेकंड (2.5 sec) और सांस बाहर छोड़ने का समय भी ढाई सेकंड (2.5 sec)आदर्श बताया गया है| इस तरह भस्त्रिका प्राणायाम एक मिनट में 12 बार किया जा सकता है।

अनुलोम विलोम 

अपनी सुविधानुसार पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठ जाएं। दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से 4 तक की गिनती में सांस को भरे और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। तत्पश्चात दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और दायीं नासिका से सांस को बाहर निकालें। 
– अब दायीं नासिका से ही सांस को 4 की गिनती तक भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें। इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट तक कर सकते हैं। 

लेखक जाने-माने योग शिक्षक हैं , मूल रूप से ऋषिकेश के रहने वाले हैं और बीजिंग में वी योग एकेडमी चलाते हैं।  

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