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क्या मंगल/Mars में बस पाएंगे एक करोड़ लोग ?पढ़िए पूरी स्टोरी

अब तक मंगल ग्रह के अन्वेषण की सफलता दर करीब 42 फीसदी रही है। अमेरिका, सोवियत संघ, जापान, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और भारत डिटेक्टर को मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचाने में कामयाब रहे हैं।

वहीं आगामी सात महीनों में दुनिया की नज़र चीन के इस मार्स रोवर पर होगी। अगर मिशन सफल रहा, तो चीन दुनिया में पहला देश होगा, जो मंगल ग्रह के पहले अन्वेषण में ही सॉफ्ट लैंडिंग पूरा कर ले।

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अंतरिक्ष यानी स्पेस कार्य का विकास और अंतरिक्ष की खोज हर देश की व्यापक क्षमता दिखाती है। इसका महत्व समझा जा सकता है। स्पेस एक्स के सीईओ एलन मस्क ने दावा किया था कि वे एक करोड़ लोगों को मंगल ग्रह में पहुंचाएंगे। कुछ देशों ने इस जुलाई में मार्स रोवर छोड़ने की योजना का ऐलान किया था। इस बीच चीन ने बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजकर 41 मिनट पर अपना पहला मार्स रोवर थ्येनवन नंबर-1 सफलता से लांच किया। बताया जाता है कि अगले सात महीनों में थ्येनवन नंबर-1 की उड़ान जारी रहेगी और तब जाकर वह मंगल ग्रह में पहुंचेगा। इसका लक्ष्य मंगल ग्रह की परिक्रमा, मंगल ग्रह में लैंडिंग और गश्त का मिशन पूरा करना है।

ऐसे में आने वाले कुछ महीनों में दुनिया के विज्ञान प्रेमियों की नज़र चीन के इस मार्स रोवर पर लगी रहेगी। अगर मिशन सफल रहा, तो चीन विश्व में पहला देश बन जाएगा, जो मंगल ग्रह के पहले अन्वेषण में ही सॉफ्ट लैंडिंग पूरा कर पाएगा।

गौरतलब है कि अब तक मंगल ग्रह के अन्वेषण की सफलता दर करीब 42 फीसदी रही है। अमेरिका, सोवियत संघ, जापान, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और भारत डिटेक्टर को मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचाने में कामयाब रहे हैं। वहीं अमेरिका और सोवियत संघ ने मंगल ग्रह में सॉफ्ट लैंडिंग की। सिर्फ अमेरिका ही मंगल ग्रह में सैर कर निरीक्षण कर सका है।

हालांकि मंगल ग्रह के अन्वेषण में कई जोखिम मौजूद हैं, बावजूद इसके कई देश मिशन में लगे हैं। इस साल की गर्मियों में तीन देशों के डिटेक्टर मंगल ग्रह में जाएंगे। दो दिन पहले ही संयुक्त अरब अमीरात ने होप नामक मार्स रोवर छोड़ा। जबकि अब चीन ने भी ऐसा ही किया है। रिपोर्ट है कि अमेरिका 30 जुलाई को मार्स रोवर लांच करने वाला है।

 जरा सोचिए कि ये देश मंगल ग्रह के अन्वेषण के लिए इतनी बड़ी कीमत क्यों चुकाना चाहते हैं? एक वजह तो यह है कि मंगल ग्रह पृथ्वी से नजदीक है और वहां का वातावरण पृथ्वी के जैसा है। इसलिए वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि क्या मंगल ग्रह में जीवन की संभावना हो सकती है या नहीं।

इस बात के सबूत भी मिल चुके हैं कि मंगल ग्रह में पानी और वायुमंडल मौजूद हैं। पृथ्वी से अलग चीज़ यह है कि वहां के वायुमंडल में मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है, लेकिन इससे ऑक्सीजन निकाली जा सकती है। इससे लोग सांस ले सकते हैं और ईंधन भी बनाया जा सकता है। ऐसे में भविष्य में रोबोट या मनुष्य के संभवतः मंगल ग्रह में रहने की उम्मीद जग जाती है।

 

साभार-चाइना मीडिया ग्रुप

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