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ऐसा है हमारा अल्मोड़ा, क्या बच्चे, क्या बूढ़े मदद को सब आए आगे

कोरोना महामारी से देश संकट में है। ऐसे वक्त से देश को उबारने के लिए लोग भी अपने तरीके से कुछ न कुछ प्रयास कर रहे हैं। कोई भूखों को खाना खिला रहा है तो कोई जरूरमंदों की सहायता के लिए चल रहे अभियान में सहयोग कर रहा है। इसी राह में अल्मोड़ा का रोटी बैंक भी खड़ा हो गया। इस बैंक को चलाने के लिए पैसा देने वालों को न नाम की चिंता है न ही अखबारों में फोटो की। कस्बे के दानी लोग ‘प्रेरणा एक प्रयास ‘नाम से खुले बैंक खाते में पैसे जमा कर रहे हैं तो बच्चे भी अपना गुल्लक दान कर रहे हैं। अल्मोड़ा की इस नेकी की चर्चा आज दूर-दूर तक हो रही है।

By Digvijay Bisht, Almora

ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के।
अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के ।।
अमृतसर के चीमाखुर्द गांव में जन्मे, नैनीताल के बाजपुर को खेती कर आबाद करने वाले बल्ली सिंह चीमा की इन पंक्तियों से ही शायद अल्मोड़ा वालों ने सीख ली होगी। जब लाॅकडाउन से गरीबों के सामने भोजन का संकट आया तो उनकी भूख मिटाने के लिए एक आदमी आगे आया। उसकी पहल पर फिर आहिस्ता-आहिस्ता सभी लोग जुट गए। उनके प्रयासों से पैदा हुआ श्री लक्ष्मी भंडार ‘हुक्का क्लब’ में रोटी बैंक। इस बैंक के नोडल अधिकारी हैं डाॅ. अजीत तिवारी। इस अनोखे बैंक में भूख से निपटने का इंतजाम है। इस बैंक की एटीएम सेवा भी है, वो भी मोबाइल एटीएम। जो सूचना देने पर खाना घर तक पहुंच जाता है।
ये बैंक है जनता का ‘रोटी बैंक’। इस बैंक में सामर्थवान लोग कैश (रुपये) देते हैं उसके बदले उनको मिलती हैं अनगिनत दुआएं। उनके दिए अर्थ से जुट रहा है भूखों का भोजन। इस नेक कार्य का जिम्मा जिन कंधों पर है वो हैं डाॅ. अजीत तिवारी। डाॅ. तिवारी के साथ जुटे हैं नगर के तमाम जागरूक लोग जो सुबह होते ही यहां पहुंच जाते हैं लगतार 14 घंटे यहां डटे रहते हैं।

और ऐसे चल पड़ा रोटी बैंक
डाॅ. अजीत तिवारी ने बताया कि 22 मार्च को जिलाधिकारी नितिन भदौरिया से रोटी बैंक चलाने को लेकर चर्चा की गई। कई दिनों की मशक्कत के बाद 29 मार्च को रोटी बैंक का श्रीगणेश हुक्का क्लब में हुआ। मुझे रोटी बैंक का नोडल बना दिया गया। अर्थ जुटाने के लिए जिलाधिकारी ने ‘प्रेरणा एक प्रयास’ नाम से एक खाता बैंक में खुलवाया जिसमें लोग दान दे सकें। 4 से 5 लोगों के साथ आरंभ हुआ इस रोटी बैंक में आज उचित दूरी के मानकों का पालन करते हुए रोज लगभग 150 लोग स्वयं सेवक जुट रहे हैं। रोटी बैंक का खर्चा दानदाताओं के दम ही हो रहा है। शुरुआत में पांच दिनों में रुपए जुटाने में थोड़ी परेशानी हुई, बाद में लोगों का दान आता गया और मुश्किल आसान हो गई। आज बैंक खाते में पर्याप्त रुपये हैं, जिससे ये काम आसानी से चल रहा है।

खाने वालों की फरमाईश पर भी मैन्यू
लंच पैक में सात सौ ग्राम से सवा किलो तक का खाना पैक रहता है। भोजन में दाल, चावल, रोटी, सब्जी मिलती है। ये मैन्यू प्रतिदिन बदलता है, दाल में राजमा, झोली, छोले, मिक्स दाल, अरहर, मलका। सब्जी में मिक्स वेज, आलू-गोभी, आलू-न्यूट्रीला, लौकी, बैंगन आदि। कई बार खाने वालों की फरमाईश पर भी मैन्यू में बदलाव किया जाता है। खाना बनाने से पैकिंग का कार्य विशेष देख-रेख में किया जाता है।

इस तरह काम करता है भोजन का एटीएम
जो भी जरूरतमंद हैं वह श्री लक्ष्मी भंडार ‘हुक्का क्लब’ में आकर सूचना दे सकते हैं। वार्ड मैंबर के द्वारा खाना उनके घर तक पहुंचाया जाता है, ग्रामीण इलाकों के जो लोग हैं वहां ग्राम प्रधान के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ यहां तमाम स्वयंसेवक हैं जो भूखे परिवारों की पहचान कर उन तक खाना पहुंचाते हैं। ये पूरा सिस्टम मोबाइल एटीएम की तरह काम कर रहा है।

बच्चे दे जाते हैं अपना गुल्लक
डाॅ. अजीत तिवारी ने बताया कि जिलाधिकारी ने निर्देशन में संचालित हो रहे बैंक खाते में लोग रुपए जमा कर रहे हैं। रुपए जमा करने वालों को रोटी बैंक वाले तक नहीं जानते। ये आनलाइन या खुद बैंक के खातों में रुपए जमा कर रहे हैं। बच्चे यहां आकर अपनी गुल्लक तक दे जाते हैं। कुछ ऐसे हैं जो यहां आ चुपचाप रुपए देते हैं, तो हम उनसे बैंक में पैसा जमा करने को कहते हैं। जो लोग बैंक नहीं जाते तो उनका पैसा स्वयंसेवक खाते में जमा कर देते हैं। हमारा यह रोटी बैंक लोगों को नेकी का पाठ पढ़ा रहा है।

सोशल मीडिया थोड़ा खट्टा थोड़ा मीठा
कुछ पेट भरे लोगों को सोशल मीडिया की भूख होती है। ये रोटी बैंक वालों को परेशान भी करते हैं। यहां हर दूसरे दिन कुछ ऐसे लोग भी आते हैं जो एक रोटी बेलते हैं और दस फोटो खिंचा के चल देते हैं। कुछ ऐसे भी हैं कि सेल्फी लेने के लिए अपना मास्क भी हटा देते हैं। अपनी फोटो को सोशल मीडिया में डाल इतराते हैं। ऐसे लोगों से काम में व्यवधान पड़ता है। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया ही इस नेकी के कार्य को आगे भी बढ़ा रहा है।

इस बैंक में किसी को कोई पद नहीं दिया गया है। यहां सभी संप्रदाय के लोग, तमाम राजनीतिक दल, पालिका के सभी मैंबर, नगर से लगे ग्रामीण इलाकों के प्रधान और विभिन्न संगठनों के लोग वैश्विक आपदा में मदद कर रहे हैं। एक साथ, एक स्वर में पूरी दुनिया को एकता का पाठ पढ़ा रहे हैं। कुल मिलाकर यहां आने वाले सभी स्वयंसेवक हैं। जो समाज को बेहतर दिशा देने के लिए जुटे हैं।

ऐसे दीप से दीप हुआ रोशन
अल्मोड़ा के रोटी बैंक की चर्चा पूरे देश में है। मीडिया के माध्यम से जब लोगों को पता चला तो उन्होंने अपने नगर में भी रोटी बैंक खोल दिए। डाॅ. तिवारी ने बताया कि सीमांत जिला पिथौरागढ़, चंपावत में भी ये बैंक चल रहे हैं। अल्मोड़ा आकाशवाणी से भी रिपोर्ट प्रसारित हुई उसके बाद मुरादाबाद, नजीमाबाद, बरेली, बिजनौर के साथ उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों से फोन आए। उन्होंने अब अपने-अपने इलाकों में रोटी बैंक खोल दिए हैं। अल्मोड़ा में कोई भूखा नहीं सोएगा इसी संकल्प के साथ रोटी बैंक कार्य कर रहा है। जब तक लाॅक डाउन रहेगा तब तक ये बैंक कार्य करता रहेगा। यदि लाॅकडाउन खुलता है तो उसके बाद भी जरूरतमंदों को भोजन की व्यवस्था की जाएगी।

यदि आप भी इस अभियान में सहयोग करना चाहते हैं तो इस खाते में पैसा जमा कर सकते हैं।प्रेरणा एक प्रयास
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Ifsc AUCB0000040

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