कला संस्कृति

घर-घर इसलिए आता है श्री गंगा दशहरा द्वार पत्र

By Aashish Pandey

हल्द्वानी। उत्तराखंड अपनी खूबसूरती और तीज त्यौहारों के लिए जाना जाता है। गौर करें तो पहाड़ में हर महीने कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है। आज गंगा दशहरा है। गंगा दशहरा देशभर में मनाया जाता है। इस दिन गंगा को जल अर्पण किया जाता है और सुख समृद्धि की कामना की जाती है। मगर इन सब मान्यताओं के साथ उत्तराखंड में इस त्यौहार को मनाने तरीका विशिष्ट है। वो विशिष्टता गंगा दशहरा पत्रक की है। यह पत्रक दरवाजों और मंदिरों में लगाया जाता है। कई घरों में तो यह सालभर लगा रहता है।

इस पत्रक में श्री गंगा दशहरा द्वार पत्र लिखा होता है। इस पत्रक में विशेष रंगों का उपयोग किया जाता है। पत्रक में शंकर भगवान और लक्ष्मी का चित्र बना होता है। पहले यह पत्रक हाथ से ही बनाया जाता था, अब हाथ और प्रिंटिंग वाले दोनों पत्रक लोगों तक पहुंच रहे हैं। पंडित अपने यजमानों तक इस पत्रक को पहुंचाते हैं। हालांकि यह पत्रक अब बाजार में भी आसानी से मिल जाता है। इसको घर के दरवाजे पर लगाने से दरिद्रता दूर होती है और कष्टों का निवारण होता है ऐसा माना जाता है।

Ganga dashahra patrak

जेष्ठ शुक्ल दशमी तिथि के दिन गंगा दशहरा मनाया जाता है। स्कंद पुराणों में गंगा दशहरा का वर्णन कुछ इस प्रकार से मिलता है, पुराणों में लिखा है कि जेष्ठ शुक्ल की दशमी तिथि संवत्सर तिथि मुखी मानी गई है। इसीलिए इस दिन स्नान और दान श्रेष्ठ होता है। कहा जाता है इस इस त्यौहार को मनाने से घर में सुख समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है।

इस दिन लोग गंगा जी में या अपने आसपास की नदियों में जाकर गंगा जी को जल अर्पण करते हैं। गंगा जी का ध्यान करते हुए और सुख समृद्धि की कामना करते हैं। दान के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है।

Ganga dashahra patrak

यह भी मान्यता है गंगा दशहरा मनाने की

कहा जाता है कि ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। यह दिन बहुत ही अनूठा और भाग्यशाली मुहूर्त था। इस दिन दस शुभ योग बन रहे थे। इन सभी दस शुभ योगों के प्रभाव से गंगा दशहरा के पर्व में जो भी व्यक्ति गंगा में स्नान करता है उसके दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं।

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