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इस देश में भी है धान का कटोरा, पढ़िए पूरी स्टोरी

विश्व में काली मिट्टी के लिए मशहूर क्षेत्रों की बात करें तो उत्तर-पूर्वी चीन के मैदानी क्षेत्र, अमेरिका व कनाडा के मैदानी इलाके, उत्तरी अर्जेंटीना के पाम्पास और चाको क्षेत्र, पराग्वे व दक्षिण-पूर्व बोलिविया प्रमुख हैं। जबकि भारत में भी कुछ राज्यों में काली मिट्टी पायी जाती है।

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वैसे तो चीन के हर क्षेत्र की कोई न कोई विशेषता रही है, लेकिन उत्तर-पूर्वी इलाके का चीलिन राज्य अपनी अलग ही पहचान रखता है। उत्तर कोरिया और रूस से सटे हुए इस प्रांत की काली मिट्टी बहुत उपजाऊ मानी जाती है। 1949 में नए चीन की स्थापना के बाद चीलिन प्रुमख हैवी इंडस्ट्री व अनाज उत्पादक के रूप में सामने आया। यहां के एफएडब्ल्यू ग्रुप द्वारा बनायी जाने वाली कारें बहुत लोकप्रिय हैं। वहीं ट्रेनों का निर्माण करने वाली छांगछुन सीआरआरसी कंपनी भी इसी राज्य से संचालित होती है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि चीन की तरक्की में इस प्रांत का कितना योगदान रहा है।

खाद्यान्न उत्पादन की बात करें तो यहां धान, सोयाबीन, मक्के और जिनसेंग आदि की खूब पैदावार होती है। जैसा कि इंडिया में छत्तीसगढ़ बहुत मशहूर है, उसी तरह चीन में चीलिन कोधान का कटोरा’ माना जाता है।

ध्यान रहें कि चीन सरकार कृषि उत्पादन को बेहद अहम समझती है, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 22 जुलाई को इस क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अनाज उत्पादन, काली मिट्टी के संरक्षण व प्रयोग आदि स्थिति की विस्तार से जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि हाथ में अनाज होगा तो मन में चिंता नहीं होगी। विशेषकर कोरोना वायरस महामारी के दौर में दुनिया संकट का सामना कर रही है, ऐसे में चीन कृषि में अपनी प्रधानता को बरकरार रखने के लिए कोशिश कर रहा है। ताकि देश की बड़ी आबादी के सम्मुख खाद्यान्न संकट खड़ा न हो।

                                                   बेहद कीमती होती है काली मिट्टी

काली ज़मीन बहुत उपजाऊ होती है, इसलिए इसे मूल्यवान संसाधन भी माना जाता है। चीन में इस तरह की ज़मीन का कुल क्षेत्रफल 10.3 लाख वर्ग किमी. है। जिसमें आदर्श काली-भूमि का क्षेत्रफल 1.7 लाख वर्ग किमी. बताया जाता है। इस मिट्टी में ही तमाम चीज़ें उगाई जाती हैं। उत्तर-पूर्व चीन के हेलोंगच्यांग और चीलिन दोनों प्रांतों में यह मिट्टी प्रचुर मात्रा में पायी जाती है।  

 

दुनिया में कहां-कहां पायी जाती है काली मिट्टी

विश्व में काली मिट्टी के लिए मशहूर क्षेत्रों की बात करें तो उत्तर-पूर्वी चीन के मैदानी क्षेत्र, अमेरिका व कनाडा के मैदानी इलाके, उत्तरी अर्जेंटीना के पाम्पास और चाको क्षेत्र, पराग्वे व दक्षिण-पूर्व बोलिविया प्रमुख हैं।

इंडिया में काली मिट्टी

इंडिया में काली मिट्टी अलग से पहचान में आ जाती है, इसे रेगुर के नाम से भी जाना जाता है। काली मिट्टी को लावा मिट्टी भी कहा जाता है, क्योंकि यह दक्कन ट्रैप के लावा चट्टानों के टूटने-फूटने से बनी  मिट्टी है। बताते हैं कि इस मिट्टी में नाइट्रोजन,पोटास,ह्यूमस की कमी होती है। लेकिन यह कपास की खेती वाली मिट्टी के रूप में भी प्रसिद्ध है। काली मिट्टी मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरातमध्य प्रदेश में पाई जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस मिट्टी में मैग्नेशियम,चूना,लौह तत्व व कार्बनिक पदार्थ अधिकता में मौजूद होते हैं।

 

चीलिन की आबादी 

चीलिन की आबादी लगभग 2 करोड़ 69 लाख है, जिनमें हान, कोरियाई, मंगोलियाई और ह्वेई आदि जातियों के नागरिक शामिल हैं।

साभार- अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप

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