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जानलेवा कोरोना वायरस दुनिया से इतनी जल्दी जाने वाला नहीं

By G D Pandey

मौजूदा वैश्विक परिदृश्य इस आशय का बोध करा रहा है कि विश्व के अभी तक आविर्भूत समस्त  सामाजिक-आर्थिक व्यवस्थाओं के पटाक्षेप की परिस्थितियां परिपक्व हो चुकी हैं और एक नया वैश्विक परिदृश्य अपनी झलक दिखाने लगा है। वर्तमान समय को कोरोना काल कहने में कहीं कोई हिचक नहीं है। इस समय भारत समेत पूरे विश्व में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में विजय प्राप्त करना ही एकमात्र एजेंडा है। 

सदा सर्वदा घर से बाहर परस्पर सुरक्षित दूरी बनाए रखने की चुनौती-

कोरोना वायरस एक ऐसा जानलेवा विषाणु है जो दुनिया से इतनी जल्दी जाने वाला नहीं है क्योंकि इसका अभी तक कोई कारगर टीका तैयार ही नहीं हुआ है। इससे यह जाहिर होता है कि दुनिया में सभी लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग अर्थात एक दूसरे से कम से कम एक या डेढ़ मीटर की दूरी बनाए रखने की आदत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना होगा। यदि दुनिया में कोरोना वायरस का प्रकोप कुछ कम भी हो जाता है और लाॅकडाउन खुल भी जाता है तो भी जानलेवा कोरोना वायरस की संभावना तो हमेशा ही बनी रहेगी।

यह डर आम जनता में व्याप्त हो चुका है कि यह वायरस जानलेवा है, इसलिए कोई नहीं चाहेगा कि वह अथवा उसका परिवार, रिश्तेदार कोई इससे संक्रमित हो । इलाज के अभाव में लोगों के पास सबसे अच्छा बचाव का उपाय सोशल डिस्टेंसिंग ही है। इसलिए हाथ मिलाना, गले मिलना, भीड़-भाड़ाके वाली जगहों पर बेफिक्र घूमना, बड़े-बड़े धार्मिक व सामाजिक आयोजनों में पहले की तरह असुरक्षित रूप से शामिल हो जाना इत्यादि सब मेल -मिलाप के तौर.तरीकों का युग परिवर्तित होकर सामाजिक सुरक्षा व मेल -मिलाप के नए तौर-तरीकों का युग पदार्पण इसी कोरोना काल में कर चुका है और हमेशा चौकन्ना लोगों की आदत में शुमार हो जाएगा। कुछ समय तब यह चुनौतीपूर्ण कार्य रहेगा लेकिन धीरे.-धीरे रोजमर्रा की आदत तथा सभ्यता का हिस्सा बन जाएगा।

 जीवन शैली में बदलाव को स्वीकार ने तथा लागू करने की चुनौती

यह भी समाज के सभी वर्गों के लिए एक नए सामाजिक परिवेश में जिंदगी जीने की एक बड़ी चुनौती है। साफ-सफाई से रहना धूम्रपान, शराब तथा फास्ट फूड से बचना, सुरक्षित व घर का बना भोजन करना, घर में बच्चों के साथ अधिक वक्त बिताना, स्वास्थ्य के प्रति सजग व संयमित रहना, अनुशासित जीवनशैली अपनाना, निरोगी काया बनाए रखना इत्यादि सब चीजें कोरोना के बाद के समय की चुनौतियों में शामिल हैं। जहां तक कामगार या मजदूर वर्ग का सवाल है, उन्हें साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना होगा। उनकी माली हालत का यह अभिप्राय नहीं रहेगा कि वह साफ-सफाई से दूर रहकर गंदगी फैलाएं। जिस प्रकार मजदूर वर्ग को बेहतर आर्थिक सुविधाओं के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होता है उसी प्रकार की एकजुटता अपने आसपास तथा अपनी बस्तियों में स्वच्छता के लिए भी दिखने की चुनौती कुछ समय तक रहेगी । अभी तक की उनकी आदतें जहां पर रह रहे हैं उस जगह की तथा अपने शरीर की स्वच्छता का ध्यान न रखना, मैले कुचेले कपड़ों को पहनते रहना, नहाने धोने में कोताही बरतना इत्यादि सब का त्याग करके स्वच्छता को अपनाना होगा। इसके लिए उन्हें तन और मन से सक्रिय रहना होगा । अगर कोई यह कहे कि मजदूर साफ-सफाई कैसे करेंगे, उनके पास न समय है और न ही पैसा, तो यह कहना व्यावहारिक नहीं होगा क्योंकि साफ-सफाई रखना कोई अधिक खर्च का काम नहीं है।

शासन प्रशासन की यह एक सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वह जनता के पैसों का इस्तेमाल जनता की बेहतर जिंदगी के लिए करें। मजदूर वर्ग को उनकी न्यूनतम आवश्यकता पर आधारित रोटी-कपड़ा व मकान तो कम से कम मुहैया कराएं । यदि कोई सरकार इतना भी नहीं कर सकती है तो उसे मजदूर वर्ग से वोट लेकर सत्ता के सुख को भोगने का भी कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। यह किस व्यवस्था का न्याय है कि जो मेहनतकश वर्ग मालिक वर्ग के शोषण उत्पीड़न का शिकार होने के बाद भी उसके लिए इतना उत्पादन करके देता है कि मालिक वर्ग अधिक से अधिक मुनाफा कमाकर गुलछर्रे उड़ाता है और कुछ ही वर्षों में एक की जगह अनेक फैक्ट्रियां या कारखाने खड़े कर देते हैं, ऐसे मेहनतकश वर्ग को रोटी,कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए मोहताज रहना पड़ता है। आज भारत सहित दुनिया का यह परिदृश्य नए आयामों के साथ बदल रहा है । मालिक वर्ग और मजदूर वर्ग के परस्पर संबंध तथा अंतर्विरोध भी बदलेंगे । इसलिए यह एक बड़ी चुनौती है कि नई जीवन पद्धति व जीवनशैली को मानसिक और शारीरिक रूप से अपनाया जाए।

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ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मेहनतकश वर्ग के किसान, मजदूर, छात्र तथा नौजवान बेरोजगारों के सामने भी नई जीवन पद्धति तथा नई जीवन शैली को अपनाते हुए आजीविका के लिए संघर्षरत रहने की एक अहम चुनौती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में युवा वर्ग की महत्वपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका रहेगी इसलिए, अभी से सक्रिय होने की आवश्यकता है।

लेखक भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य  मंत्रालय के प्रशासनिक अधिकारी पद से अवकाश प्राप्त हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेखन और संपादन से जुड़े हैं।

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