धर्म कर्म

हाट कालिका से जुड़े हैं कई रहस्य, सैनिकों की रक्षक भी है माता

By Aashish Pandey

देवभूमि उत्तंराखड में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं। जिनकी मान्यता देशभर में है। एक ऐसा ही आस्था का का केन्द्र है गंगोलीहाट स्थित हाट कालिका का मंदिर। हाट कालिका यानी महाकाली मंदिर से अनेक रहस्य और कथाएं जुड़ी हैं। इस देवी को रणभूमि में जवानों की रक्षक भी माना जाता है। यही वजह है कि कुमाऊॅ रेजीमेंट के जवान हों या अफसर मां के दर पर जरूर हाजिरी लगाते हैं।

पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट स्थित हाट कालिका मंदिर की मान्यता दूर दूर तक फैली है। कहते हैं कि कालिका माता की इस पावन शक्ति पीठ की स्थापना आदिगुरु शंकराचार्य ने छठी शताब्दी पूर्व की थी। हरे भरे देवदार के पेड़ों से घिरा यह मंदिर गंगोलीहाट मुख्य बजार से एक किलोमीटर दूरी पर स्थित है। भक्तों का हाट कालिका पर अटूट विश्वास है। इसकी वजह इस मंदिर से जुड़े रहस्य और कथाएं हैं। कहते हैं कि मंदिर में मां हर रात विश्राम करने के लिए आती है। रणभूमि में जवानों की रक्षक भी इस देवी को माना गया है। हाट कालिका में सिपाही से लेकर सेना के अफसर तक हाजिरी लगाने आते हैं। कुमाऊॅ रेजीमेट के जवानों की तो यहां भीड़ लगी रहती है।

वैसे तो मंदिर में भक्त दर्शन के लिए दूर दूर से आते हैं मगर गंगोलीहाट क्षेत्र में रहने वाले लोग कोई नया या शुभ काम करने से पहले माता का आशीर्वाद जरूर लेते हैं।

किंवदंति है कि हर  रात मंदिर में माता सिंहासन लगता है और माता हर रात वहां आती हैं, विश्राम करती हैं। जो भक्त मंदिर में सच्चे मन से माता के दर्शन के लिए आता है, माता उसकी हर इच्छा को पूरी कर देती है। हाट कालिका में अब शादिया भी खूब होती हैं।

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