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शिक्षक दिवस विशेष: कोरोनाकाल में भी शिक्षा के प्रति समर्पित रहे अल्मोड़ा जिले के ये शिक्षक

Report ring Desk

अल्मोड़ा। देशभर में आज पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जा रही है। किसी भी छात्र के जीवन में एक शिक्षक का खास महत्व होता है। कहा जाता है कि किसी भी बच्चे के लिए सबसे पहले स्थान पर उसके माता-पिता और फिर दूसरे स्थान पर शिक्षक होता है। हर बच्चे के भविष्य में शिक्षक का एक महत्वपूर्ण योगदान रहता है। आज के दिन शिक्षकों के प्रयासों और उनकी मेहनत को हर कोई सलाम कर रहा है। आज आपको उन शिक्षकों के बारे में भी बताएंगे जो कोरोनाकाल में भी अपने शिक्षण कार्य के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे।

कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा असर अगर किसी पर पड़ा है तो वह है शिक्षा। मार्च 2020 में कोरोना के चलते लागू हुए लाकडाउन के कारण तमाम शिक्षण संस्थान भी बंद हो गए, जिस कारण बच्चे भी पढ़ाई से दूर हो गए और उनका भविष्य अधर में लटक गया। ऐसे में बहुत सारे स्कूलों ने आनलाइन पढ़ाई के जरिए बच्चों के पठन-पाठक को सुचारू रखा। लेकिन पर्वतीय इलाकों के बहुत सारे बच्चे कोविड काल में आर्थिक स्थिति या फिर अन्य कारणों के चलते आनलाइन पढ़ाई से नहीं जुड़ सके। ऐसे में अल्मोड़ा जिले के विकासखंड भैसियाछाना स्थित राजकीय जूनियर हाईस्कूल चनोली के शिक्षक कल्याण मनकोटी, विकासखंड धौलादेवी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला के शिक्षक भाष्कर जोशी और राजकीय प्राथमिक विद्यालय कपकोली के शिक्षक राजेश जोशी ने कोरोना काल में बच्चों के लिए जो कार्य किए वे शिक्षा जगत में एक अलग छाप छोड़ गए। कोरोना काल में वंचित बच्चों के लिए उन्होंने जो कार्य किए उसकी प्रशंसा हर तरफ हुई।

सुर्खियों में रहा राजकीय जूनियर हाईस्कूल चनोली में शिक्षक कल्याण मनकोटी का ‘विद्यालय चले बच्चों के द्वार’ अभियान

विकासखंड भैसियाछाना के राजकीय जूनियर हाईस्कूल चनोली में कार्यरत और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक कल्याण मनकोटी ने कोरोना काल में असुविधाओं के बावजूद बच्चों के लिए जो कार्य और प्रयास किए उसकी चहुंओर प्रशंसा की गई। लॉकडाउन के बाद उनके द्वारा बच्चों के लिए चलाए गए अभियान – ‘विद्यालय चले बच्चों के द्वार’, ‘ब्रिज कोर्स’, ‘समर कैम्प अभियान’ ने एक अलग छाप छोड़ी, जिसने भी उनका यह कार्य देखा उनके कार्यो की वाहवाही ही की। इन अभियानों के तहत शिक्षक मनकोटी ने बच्चों के घर-घर जाकर कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जागरूकता अभियान, साफ सफाई अभियान तो चलाया ही साथ ही जरूरतमंद बच्चों के लिए पढऩे-लिखने, खाने-पीने के संसाधन भी उपलब्ध कराए। लॉकडाउन के शुरूआती दौर में उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई के तहत विज्ञान, गणित और अन्य विषयों के वीडियो बनाकर बच्चों तक पहुंचाए और बच्चों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई। अनलॉक के बाद उन्होंने ‘विद्यालय चले बच्चों के द्वार’ अभियान के तहत घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में पारंगत किया। गॉव में ही तब उन्होंने अपना डेरा डाल लिया और बच्चों के प्रति समर्पित रहे। उनकी इन सारी गतिविधियों की अभिभावकों समेत सोशल मीडिया और अधिकारियों ने भी खूब प्रशंसा की।

शिक्षक भाष्कर जोशी ने बनाई विद्यालय की वेबसाइड

विकासखण्ड धौलादेवी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला में कार्यरत शिक्षक भाष्कर जोशी कोरोना काल में भी बच्चों के प्रति पूरी तरह समर्पित दिखे। हर बार की तरह कोरोनाकाल में भी उनके कार्यों की हर तरफ प्रशंसा की गई। लॉकडाउन शुरू होते ही उन्होंने अपने विद्यालय के बच्चों समेत अन्य विद्यालयों के बच्चों को भी वाट्सएप या अन्य मोबाइल नेटवर्क की सहायता से पढ़ाना शुरू कर दिया था।

हर रोज, हर तीज-त्यौहार पर उन्होंने बच्चों के लिए एक से बढ़कर एक प्रोग्राम तैयार किए। यही नहीं उन्होंने बच्चों के लिए विद्यालय की वेबसाइड भी बना डाली जिसमें बच्चों के लिए हर रोज की वर्कशीट समेत सभी विषयों के वीडियो उपलब्ध कराए गए। उन्होंने बच्चों के लिए बजेला ऑनलाइन ऐप भी बनाया। इस एप का लाइब्रेरी सेक्शन’ चलता चल बढ़ता चल] के बाल साहित्य को काफी पसंद किया गया।

कोरोनाकाल में बच्चों को पढ़ाते रहे शिक्षक राजेश जोशी

विकासखण्ड धौलादेवी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय कपकोली मेंं कार्यरत शिक्षक राजेश जोशी भी लॉकडाउन से ही बच्चों की पढ़ाई के प्रति सजग और समर्पित रहे। लॉकडाउन और अनलॉक में वे अपने घर नहीं गए बल्कि किराए के रूम में ही रहकर बच्चों को पढ़ाने के लिए वहीं से पाठशाला चलाई और अलग-अलग शिफ्टों में बच्चों को अपने पास बुलाकर पढ़ाते रहे।

बच्चों की पढ़ाई के लिए समर्पित शिक्षक राजेश जोशी ने अपने विद्यालय ही नहीं अपितु अगल-बगल के विद्यालयों चमुवां और पपगाढ़ के प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को भी अपने पास बुलाकर पढ़ाया। उनके इस कार्य और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को क्षेत्र के लोगों और अभिभावकों द्वारा खूब सराहा गया।

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