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इस बार नीब करौरी महाराज के दर्शन से नहीं बल्कि उनकी महिमा को पढ़कर कमाएं पुण्य

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भवाली। भक्त इस बार 15 जून को कैंची धाम में नीब करौरी महाराज के दर्शन नहीं कर पाएंगे। घर पर ही बाबा का स्मरण कर पुण्य कमाया जा सकता है। कोरोना संक्रमण के चलते कैंची धाम में इस बार भंडारे और मेले का आयोजन नहीं हो रहा है। हालांकि मंदिर में पूजा और अन्य कार्यक्रम तो होंगे पर इसमें मंदिर के लोग ही शामिल होंगे। हर साल कैंची धाम की स्थापना दिवस पर मेले व भंडारे का आयोजन होता है। इसमें हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं, बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस मेले के अलावा सालभर भी यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

भक्तों में फेसबुक के मालिक और एप्पल के मालिक स्टीव जॉब्स भी शामिल

शिप्रा नदी के तट पर स्थित आध्यात्मिक शक्ति के केंद्र कैंची धाम की मान्यता विश्वभर में है। नीम करौरी बाबा के विदेशी अनुयायियों में हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स, फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्क और एप्पल के मालिक स्टीव जॉब्स भी शामिल हैं। बाबा के विदेशी भक्तों में सर्वाधिक संख्या अमेरिकियों की ही बताई जाती है।

बताया जाता है कि बाबा नीब करौरी महाराज का जन्म 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मण शर्मा था।

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नीब करौरी महाराज को हनुमान का बहुत बड़ा भक्त माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन काल में भारत में 108 हनुमान मंदिरों का निर्माण किया गया। नीब करौरी बाबा वर्ष 1962 में कैंची धाम पहुंचे थे। 15 जून 1964 को बाबा नीब करौरी ने कैंची धाम की नींव रखी थी। इसके बाद से हर साल कैंची धाम में 15 जून को मेला आयोजित होता है।

भक्त बाबा को मानते हैं हनुमान का अवतार

बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा हनुमान जी के अवतार थे। हनुमान जी की उपासना से अनेक चामत्कारिक सिद्धियां प्राप्त थीं। कैंची धाम में बाबा के यहां आने वाला व्यक्ति खाली हाथ वापस नहीं लौटता है। मांगी गयी मनौती पूर्ण होती है। यही कारण है कि देश विदेश से हज़ारों लोग यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं। बाबा आडंबरों से दूर रहते थे। न तो उनके माथे पर तिलक होता था और न ही गले में कंठी माला। एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले बाबा अपना पैर किसी को नहीं छूने देते थे। यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे।

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बाबा के चमत्कार के किस्से सुनकर चले आते हैं भक्त

कैंची पावन धाम से बाबा के कई किस्से जुड़े हैं जिनको सुनकर भक्त यहां खिंचे चले आते हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, एक बार भंडारे के दौरान कैंची धाम में घी की कमी पड़ गई थी। बाबा के आदेश पर भक्त  नदी से कनस्तर पानी भरकर लाया। इस पानी को प्रसाद बनाने में उपयोग लाया गया तो पानी घी में बदल गया। भक्त कहते हैं कि ऐसे ही एक बार बाबा नीब करौरी महाराज ने अपने भक्त को गर्मी की तपती धूप में बचाने के लिए  बादल की छतरी बनाकर उसे उसकी मंजिल तक पहुंचा दिया।

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बाबा से अपना नाम सुनकर अजनबी पड़ा था अचरज में

स्थानीय लोगों के मुताबिक नीब करौरी बाबा 1940 के आस-पास उत्तराखंड के प्रवास पर आए थे। भवाली से कुछ किलोमीटर आगे बाबा सड़क किनारे पैराफिट पर बैठ गए। सामने पहाड़ी पर एक आदमी दिखा तो उन्होंने उसे पूरन कहकर आवाज दी। अजनबी से अपना नाम सुनकर वह व्यक्ति अचंभित हो गया। बाबा ने उससे कहा वह उसे कई जन्मों से जानते हैं। इसके बाद उस व्यक्ति ने बाबा के खाने का प्रबंध किया। खाना खाने के बाद बाबा पूरन और गांव के अन्य दो तीन व्यक्तियों को लेकर जंगल में गए। बाबा ने वहां उनसे एक जगह खोदने को कहा और कहा कि इसके अंदर गुफा और धूनी है। ग्रामीणों ने खुदाई की तो वे अचरज में पड़ गए। उन्हें ऐसा लगा कि जैसे गुफा में धूनी किसी ने अभी ही लगाई हो, धूनी के पास चिमटा भी था। बाबा ने नदी से पानी मंगवाया और उस स्थान का शुद्धिकरण किया। साथ ही वहां कुटिया नुमा जगह बना दी। यही कुटिया आज कैंचीधाम के रूप में विख्यात है।

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