साहित्य

जीवंतता की जगमगाहट है जिंदादिली

By GD Pandey, Delhi

जीवंतता की जगमगाहट है जिंदादिली,
जिंदादिली की जागीर है य़ह जिंदगी।
प्रकाश संश्लेषण और सकारात्मक ऊर्जा का,
प्रतिबिंबित पर्याय होती है जिंदादिल जिंदगी।

मां के आने की आहट, शिशु की स्वाभाविक छटपटाहट,
अबोध गोद की बेताबी, दूध पीने और पिलाने की जल्दबाजी,
मां की ममता और शिशु के अचेतन जुड़ाव की जगमगाहट।
मिलती है विरासत में जन्मजात जिंदादिली,
जिंदादिली की जागीर है यह जिंदगी।

जिंदादिली का आगोश, जवानी का जोश, लहू में रवानी,
शरीर में भरपूर जवानी, हो सकते हैं कई नौजवान मदहोश।
राजनीतिक विचारधाराओं के प्रभाव में आना,
जाने अनजाने किसी न किसी से जुड़ जाना,
किसी का प्रगतिशील और क्रांतिकारी बन जाना,
किसी का सुधारवादी और संशोधनवादी बन जाना,
क्रांतिकारियों की पसंदीदा है जिंदा दिल जिंदगी, जिंदादिली की जागीर है यह जिंदगी।

जिंदादिली किसी उम्र विशेष की मोहताज नहीं,
जिंदादिल इंसान कभी किसी का मोहताज नहीं।
20 वर्ष के कुछ नौजवान भी कमजोर दिल,
80 वर्ष के कुछ वरिष्ठ जन भी जिंदादिल।
कर्मभूमि हो या रणभूमि सर्वत्र चाहिए जिंदादिली,
जननी और जन्मभूमि का गौरव है जिंदादिली।
सभी के लिए प्रेरणादायक होती है जिंदादिली,
जिंदादिली की जागीर है यह जिंदगी।

कोई संकट हो, कोई बीमारी हो अथवा महामारी काल,
विषम परिस्थितियों से सदैव जूझना पड़ता है हर हाल।
धैर्य, साहस और इमोशनल इम्यूनिटी के कद्रदान,
फ्रंट लाइन में जिंदादिली दिखा रहे हैं जिंदादिल इंसान।
नई उमंगो तरंगों की वाहिनी है जिंदादिली,
जीवंतता की जगमगाहट है जिंदादिल जिंदगी।

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