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सातवीं कक्षा की दिया का कमाल का हुनर, बनाया बेकार सामान को भी ऐसा

By Aashish Pandey

हल्द्वानी। लाॅकडाडन का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ा है जो बच्चे घर पर एक पल नहीं टिकते थे उनको इतने दिन तक घर में कैद रहना पड़ा है । अपने पुराने खिलौनों के साथ खेलना पड़ा है।  इस लाॅकडाडन में बहुत से बच्चों ने अपने हुनर को पहचाना और कई नई नई चीजों को बनाया, जिसको बनाना बड़े लोगों के लिए भी आसान नहीं है।

कहा जाता है कि हर किसी के अंदर कोई ना कोई क्वालिटी होती है लेकिन इस लाॅकडाडन में बहुत सारे बच्चों ने अपने हुनर को पहचाना। इन्हीं बच्चों में शामिल हैं पिथौरागढ़ के गांव बस्ते निवासी स्व. जीवन चन्द्र पांडे की बेटी दिया पाण्डे। दिया महज 13 साल की हैं और कक्षा 7 में पढ़ती हैं । उन्होंने अपने घर को सजाने के लिए बहुत सारी चीजें बनायी हैं । आजकल देखा जाए तो हर कोई अपने घर को खूबसूरत बनाना चाहता है।

लाॅकडाडन में मार्केट भी बंद थी, जिसके चलते  बाजार से कोई भी सामान नहीं लाया जा सकता था। दीया ने अपने घर के पुराने कागज और अपनी पुरानी किताबों के गत्तों से बहुत सारी चीजें बनाई, जो बेहद ही खूबसूरत दिख रही है ।

वैसे तो हर बच्चा कहता है कि मैं डॉक्टर बनूंगा, टीचर बनूंगा  लेकिन दिया का सपना टीचर बनने का है ।  लॉकडाउन में बखूबी उन्होंने टीचर की भूमिका भी निभाई है, वह अपने आस पड़ोस के साथियों और छोटे बच्चों को पढ़ाती हैं । जो उन्होंने आज तक सीखा है वह उनको सिखाती हैं, कहा जाए तो वह टीचर टीचर खेलती हैं ।  दिया बताती हैं कि इस लाॅकडाडन में उन्होंने बहुत कुछ सीखा मम्मी से खाना बनाना सीखा, कपड़े धोना सीखा और बहुत सारी चीजें पुरानी  गांव की कहानियां अपनी मम्मी के मुंह से सुनी।

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