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सऊदी अरब में महिलाओं को मिला यह अधिकार, लेकिन परेशान हैं प्रवासी, जानिए क्या है मामला?


सऊदी अरब में पिछले साल सितंबर में महिलाओं को कार आदि वाहन चलाने की छूट दी गयी। यह नियम आगामी जून से प्रभावी होगा। इससे लाखों सऊदी महिलाओं को उनका एक जरुरी अधिकार तो मिलेगा, पर इसका सीधा असर 14 लाख प्रवासी ड्राइवरों की नौकरी पर पड़ेगा। अब दक्षिण एशियाई देशों के इन चालकों को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उनकी अच्छी खासी जॉब न चली जाय। 

By Jagdish Pandey, April, 23rd, 2018 

Jeddah, Saudi Arabia : सऊदी अरब में महिलाओं पर दशकों से ड्राइविंग करने पर लगा प्रतिबंध हटाने का दुनिया-भर में स्वागत हो रहा है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आधी आबादी को मिली इस आजादी से तमाम लोग परेशान भी हैं। दरअसल इस कदम से सऊदी अरब में काम करने वाले दक्षिण एशियाई मूल के लाखों नागरिकों का प्रभावित होना तय है। क्योंकि इस देश में अब तक अधिकांश घरों में ड्राइवर ही कार या अन्य वाहन चलाते रहे हैं। महिलाओं को जहां कहीं भी आना-जाना होता है ये प्रवासी चालक ही उनका सहारा होते हैं। 

सऊदी अरब के इतिहास में 26 सितंबर 2017 का दिन हमेशा याद रखा जाएगा। इसी दिन महिलाओं के वाहन चलाने पर दशकों से लगी पाबंदी को एक शाही फरमान (डिक्री) के माध्यम से हटा दिया गया। इसके चलते सऊदी अरब की महिलाएं जून 2018 से सड़कों पर अपनी मर्जी से गाड़ी चला सकेंगे। यानी उन्हें किसी ड्राइवर रुपी सहारे की जरूरत नहीं होगी। 

माना जा रहा है कि महिलाओं को मिले इस नए अधिकार से सऊदी परिवारों की लाखों डॉलर की बचत होगी।साथ ही नई कारों की बिक्री की मांग बढ़ने से कार उद्योग को जबरदस्त बूस्ट मिलने की उम्मीद है। वहीं तेल की अर्थव्यवस्था पर निर्भरता से भी देश को बाहर लाने में मदद मिलेगी। 

जहां एक तरफ सऊदी महिलाओं के पक्ष में आए इस फैसले को एक अच्छी खबर के रूप में देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर लाखों निजी पारिवारिक ड्राइवर, जो कि मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई देशों( भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश) से आते हैं, को अपनी नौकरियां खोने का डर पैदा हो गया है। 

एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक लगभग 14 लाख प्रवासी चालक निजी परिवारों के लिए टैक्सी चालक के रूप में काम करते हैं। जिन्हें औसतन हर महीने 1500-2200 सऊदी रियाल(25,500-37,400 रुपए) मिलते हैं। जिसका 60 प्रतिशत हिस्सा वे अपने परिवार के खर्चें के लिए अपने देश वापस भेजते हैं। कई चालकों के लिए यह अपने परिवार के लिए  रोजी-रोटी कमाने का एक मात्र जरिया है। इसका मतलब यह हुआ कि आने वाले समय में तमाम ड्राइवर अपनी नौकरी खोने के बाद अपने घर पैसा नहीं भेज पाएंगे। या तो उन्हें देश छोड़कर जाना होगा या फिर कोई और काम ढूंढना होगा। इस तरह लाखों ड्राइवरों की राह आसान नहीं है। 

लेखक ने ऐसे ही एक ड्राइवर से बात की, जो कि केरल के रहने वाले मोहम्मद अनवर हैं। चार साल पहले जेद्दा आए, और यहां एक उच्च मध्यम वर्गीय परिवार में ड्राइवर के रूप में काम करते हैं। महिलाओं को मिले इस अधिकार से उनको भी डर सता रहा है कि कहीं उनका स्पांसर उन्हें भारत वापस न भेज दे। हालांकि उन्हें इस बात की थोड़ी उम्मीद भी है कि शायद ऐसा बहुत जल्दी नहीं होगा। अनवर तो एक बस एक उदाहरण हैं, अरब न्यूज के मुताबिक सऊदी में करीब 13 लाख वाहन चालक हैं, जिन पर नौकरी छूटने की तलवार लटकी है। जिसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ेगा।

यहां बता दें कि सऊदी में बड़ी संख्या में केरल के ड्राइवर काम करते हैं, उन्हें काम के लिहाज से बहुत विश्वसनीय माना जाता है।  

स्थानीय समाचार पत्र अरब न्यूज के मुताबिक, वर्तमान में लगभग 87 फीसदी सऊदी परिवारों के पास निजी चालक हैं। निजी चालक रखने में परिवारों को भारी खर्च उठाना पड़ता है। जिसमें वीजा फीस, मेडिकल, इंश्योरेंस, खाना और रहना आदि मुख्य तौर पर शामिल होता है। 

जाहिर सी बात है यह कदम सऊदी सरकार और नागरिकों के लिए राहत भरी उम्मीद लेकर आया है। क्योंकि इससे 33 मिलियन सऊदी रियाल के सऊदी अर्थव्यवस्था में वापस आने का अनुमान है। साथ ही महिलाओं के ड्राइविंग से सऊदी परिवारों में वित्तीय बोझ कम करने में मदद मिलेगी और साथ ही काम करने वाली महिला कर्मचारियों की संख्या में भी इजाफा होगा।

अब तक क्या था सऊदी अरब में नियम ?

सऊदी अरब के कानून बहुत सख्त माने जाते हैं, अगर कोई महिला कार चलाती हुई पकड़ी गई तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता था। साथ ही जुर्माना देना होता था, यहां तक कि नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता था। बहुत कम मामलों में कोड़े मारने की सज़ा भी मिलती थी। हालांकि शहरों में रहने वाली कुछ महिलाएं विरोध स्वरूप कार चलाती रही हैं, जिन्हें कई बार गिरफ्तार भी किया गया। वाकई में ये चौकाने वाला तथ्य हैं, क्योंकि महिलाएं अंतरिक्ष के क्षेत्र तक में अपना झंडा गाड़ चुकी हैं, लेकिन वे ड्राइव नहीं कर सकती। सऊदी अरब में महिलाओं आदि को लेकर बने तमाम सख्त कानूनों की खूब आलोचना होती है। 

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