रोचक

परंपरा से जुड़ने का प्रवासी आइडिया : नोएडा से लौटे संतोष ने इसलिए अपनाई ओखली और चक्की

By Diwan karki

अल्मोड़ा (जागेश्वर)। पहाड़ के हर घर में काम आने वाली ओखली और हाथ की चक्की भले ही बीते जमाने की बात हो गई हो। लेकिन लॉकडाउन में अपने घर लौटे ग्राम चमुवां के संतोष कार्की ने फिर से अपने घर में हाथ की चक्की से गेहूं पीसना शुरू कर दिया है। यही नहीं संतोष कार्की घर में  ओखली भी बना रहे हैं।

प्रसिद्ध जागेश्वर धाम स्थित ग्राम चमुवा के संतोष कार्की नोएडा में किसी कंपनी में काम कर रहे थे। कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से उन्हें भी अपने गॉव लौटना पड़ा। यों तो संतोष को कुमाऊंनी गीत गाने का बचपन से शौक रहा है और जब भी उन्हें मौका मिलता है तो कुमाऊंनी गीत गाकर लोगों का मन जीत लेते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने गॉव में फिर से पुरानी परम्पराओं को अपनाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।

जब संतोष से यह पूछा गया कि हाथ की चक्की से गेहूं पीसना अब बीते जमाने की बात हो गई है और सभी लोग अब चक्की में गेहूं ले जाकर पीसते हैं। तो उनका कहना था कि जब हम कंपनियों में आठ से बारह घंटे तक काम कर सकते हैं तो यह तो आसान काम है। यह एक प्रकार का जिम है। जिम जाने के लिए तो हमें पैसे खर्च करने होते हैं जबकि इसका दोहरा फायदा है। यदि हम रोज आधा घंटा भी हाथ की चक्की से कुछ पीसते हैं या फिर ओखली में कुछ कूटते हैं तो यह हमारे लिए दोहरा फायदा है। एक तो हमें शुद्ध आटा मिल रहा है, वहीं इससे हमारी मसल्स भी बनती है। यह एक तरह की कसरत है, इसे नियमित करने से हम तंदुरुस्त भी रह सकते हैं।

संतोष कहते हैं कि उनके घर में ओखली नहीं है। पुरानी ओखली टूट चुकी थी। ऐसे में उनको एक ओखली बनाने का विचार आया। पड़ोस में किसी की पुरानी ओखली देखकर वे इन दिनों एक बड़े से पत्थर को काटकर ओखली बनाने जुट गए हैं। ऐसे ही कई हुनरमंद युवक हैं जो अब पहाड़ की पुरानी परम्पराओं को अपनाने में जुट गए हैं।

3 Replies to “परंपरा से जुड़ने का प्रवासी आइडिया : नोएडा से लौटे संतोष ने इसलिए अपनाई ओखली और चक्की

  1. Bahot bahot badhai aapko… Bahot hi achcha kaam kiya hai aapne… Jai uttarakhand jai dev bhoomi…

    1. हमें पूरे परिदृश्य को समझना होगा। लेख में बहुत विस्तार से बताया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *