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OMG: A Rare Yellow कलर का Turtle मिला यहां, वीडियो हुआ वायरल…

पीले रंग का होने की वजह से यह कछुआ/Turtle काफी चर्चा में है। इस कछुए का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है।
वन्यजीव वार्डन ने कहा कि यह एक दुर्लभ प्रजाति का कछुआ है, मैंने ऐसा कछुआ आज से पहले कभी नहीं देखा। इस कछुए को देखकर वन्यजीव विभाग के तमाम अधिकारी हैरान हैं।

 

By Suresh Agrawal, Kesinga, Odisha

ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर से कोई 196 किमी. दूर बालेश्वर (बालासोर) Balasore जिले के सुजानपुर नामक गाँव में एक दुर्लभ पीले रंग के कछुए (yellow color Turtle) को ग्रामीणों द्वारा बचाया गया है। इसके बाद इस अजूबे कछुए को वन विभाग को सौंप दिया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा कछुए की तस्वीर को ट्वीट किया गया है।

पीले रंग का होने की वजह से यह कछुआ/Turtle काफी चर्चा में है। इस कछुए का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इस बारे में वन अधिकारी सुशांत नंद ने अपने ट्विटर हैंडल के ज़रिये इस दुर्लभ कछुए के वीडियो को शेयर किया है और वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा कि ओड़िशा के बालासोर में एक दुर्लभ पीले रंग के कछुए को बचाया गया। शायद यह एक अल्बिनो था। कुछ समय पहले पाकिस्तान के सिंध सूबे में भी स्थानीय लोगों द्वारा इस तरह का कछुआ देखे जाने का जिक्र किया था।

वन्यजीव वार्डन ने कहा कि यह एक दुर्लभ प्रजाति का कछुआ है, मैंने ऐसा कछुआ आज से पहले कभी नहीं देखा। इस कछुए को देखकर वन्यजीव विभाग से संबंधित तमाम अधिकारी हैरान हैं। वन्यजीव वार्डन भानुमित्र आचार्य के अनुसार -उन्होंने इससे पहले कभी भी ऐसा कछुआ नहीं देखा था। रविवार के दिन बालासोर जिले के सुजानपुर गांव के ग्रामीणों ने इस पीले कछुए को बचाया और इसके बाद उन्होंने वन-विभाग के अधिकारियों को बुलाकर इसे उन्हें सौंप दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कछुए का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट होते ही वायरल होने लगा और न्यूज़ लिखे जाने तक इस वीडियो को 42 हजार से अधिक बार देखा जा चुका था। सोशल मीडिया यूजर्स को भी यह वीडियो काफी पसंद आ रहा है।

भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी, सुशांत नंदा ने छोटे कछुए का वीडियो ट्वीट करते हुये लिखा कि -शायद यह एक अल्बिनो था। उन्होंने एक जहाज के अंदर पानी में तैरते हुए कछुए का वीडियो साझा करते हुये यह भी लिखा कि -कुछ वर्ष पहले सिंध में स्थानीय लोगों द्वारा इस तरह के एक कछुए का रेस्क्यू किया गया था। उन्होंने कहा गुलाबी आंखें ऐल्बिनिज़म की एक सांकेतिक विशेषता है।

ट्विटर पर कई लोगों ने कहा कि -उन्होंने पहले कभी पीले रंग का कछुआ नहीं देखा था। एक ट्विटर यूजर ने लिखा है कि -मुझे लगता है कि यह ऐल्बिनिज़म है। हम अन्य जानवरों में भी ऐसा ही देखते हैं। हाल ही में उन्होंने काज़ीरंगा में एक अल्बिनो बाघ को भी पाया है।

एक यूजर ने लिखा -कुछ भी नया नहीं है, यह एक अल्बिनो इंडियन फ्लैपशेल कछुआ है और ये कछुए पूरे भारत में पाए जाते हैं। हालांकि यह विशेष रूप से बहुत ही खास है क्योंकि 10,000 शिशुओं में से केवल एक में ही एल्बिनो होता है।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने ओड़िशा के मयूरभंज जिले के देउली डैम में भी मछुआरों द्वारा ट्रायोनिडीए नामक कछुए की एक दुर्लभ प्रजाति पकड़ी गई थी। बाद में उसे विभागीय अधिकारियों को बुलाकर उन्हें सौंप दिया गया था।इस प्रजाति के कछुए को Trionychidae softshell के नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं इस प्रजाति के कछुए अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका में भी पाये जाते हैं। वन्य-विभाग के जानकारों के मुताबिक पाये गये कछुए का वजन 30 किलोग्राम से अधिक और  50 साल थी। कयास चाहे जो भी लगाये जायें, इसमें दोराय नहीं कि यह एक विरल प्रजाति का कछुआ है।

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